टाटा ट्रस्ट्स के समर्थन में उतरे 6 पारसी संगठन, पीएम मोदी को पत्र लिखकर 66% हिस्सेदारी वाले मॉडल को बताया देशहित में जरूरी

टाटा ग्रुप के भविष्य और उसके कामकाज के तरीके को लेकर चल रहे विवाद के बीच छह पारसी और जोरोस्ट्रियन संगठनों ने टाटा ट्रस्ट्स और टाटा परिवार का समर्थन किया है। इन संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर टाटा ग्रुप की मौजूदा व्यवस्था और उसकी सामाजिक जिम्मेदारियों को सुरक्षित रखने की अपील की है। उनका कहना है कि टाटा ग्रुप की पहचान केवल कारोबार से नहीं, बल्कि देश के विकास और समाजसेवा में उसके योगदान से भी जुड़ी है।

यह पत्र 7 अक्टूबर को लिखा गया था। इसमें कहा गया है कि टाटा संस की हिस्सेदारी और भविष्य से जुड़ा मामला केवल कंपनी के प्रबंधन या शेयर बाजार तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका महत्व देशहित से भी जुड़ा है। संगठनों ने चेतावनी दी कि अगर टाटा ग्रुप की लंबे समय की योजनाओं पर शेयर बाजार के तत्काल मुनाफे का दबाव बढ़ा, तो इससे उसकी पुरानी कार्यशैली और सामाजिक जिम्मेदारियां प्रभावित हो सकती हैं।

दरअसल, टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। टाटा संस, टाटा ग्रुप की प्रमुख होल्डिंग कंपनी है। टाटा ट्रस्ट्स कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराने यानी लिस्टिंग के पक्ष में नहीं है। वहीं, कंपनी के बोर्ड में इस मुद्दे पर मतभेद सामने आए हैं। ऐसे में टाटा संस की लिस्टिंग और उसके प्रबंधन को लेकर विवाद तेज हो गया है।

प्रधानमंत्री को पत्र लिखने वाले छह संगठनों में बॉम्बे पारसी पंचायती, फेडरेशन ऑफ पारसी जोरोस्ट्रियन अंजुमंस ऑफ इंडिया, फेडरेशन ऑफ जोरोस्ट्रियन एसोसिएशंस ऑफ नॉर्थ अमेरिका, जोरोस्ट्रियन ट्रस्ट फंड्स ऑफ यूरोप, ग्लोबल काउंसिल ऑफ जोरोस्ट्रियंस ट्रस्ट और वर्ल्ड जोरोस्ट्रियन चैंबर ऑफ कॉमर्स शामिल हैं। इन संगठनों ने टाटा परिवार और टाटा ट्रस्ट्स के प्रति समर्थन जताते हुए कहा कि समूह की नैतिकता, सामाजिक सेवा और देश के विकास में योगदान देने की परंपरा को बनाए रखना जरूरी है।

पत्र में टाटा समूह के लंबे इतिहास और भारत के औद्योगिक, वैज्ञानिक तथा स्वास्थ्य क्षेत्र में उसके योगदान का भी उल्लेख किया गया है। संगठनों ने कहा कि टाटा ग्रुप ने शिक्षा, चिकित्सा, अनुसंधान और उद्योग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से अपील की कि इस विवाद को केवल कारोबारी नजरिए से न देखा जाए और टाटा ग्रुप की विरासत तथा सामाजिक जिम्मेदारियों को ध्यान में रखते हुए सभी पक्ष समाधान की दिशा में आगे बढ़ें।