नई दिल्ली: कांग्रेस ने 1 नवंबर 2026 को दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाली ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ रैली के बाद चुनाव आयोग तक मार्च निकालने की तैयारी की है। पार्टी इस कार्यक्रम के जरिए मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उठाएगी। कांग्रेस ने इस रैली में करीब 10 लाख लोगों को जुटाने का लक्ष्य रखा है। हालांकि, त्योहारों के दौरान व्यापार प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए दिल्ली के व्यापारियों ने रैली की तारीख आगे बढ़ाने की मांग की है।
कांग्रेस का मुख्य विरोध मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि इस प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने से उनके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी कर रही है। पार्टी का कहना है कि मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा करना और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है। हालांकि, ये कांग्रेस के आरोप हैं, जिन पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग हो सकता है।
रैली की तैयारियों को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता बैठकें कर रहे हैं। पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा और संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने उत्तर प्रदेश और हरियाणा के नेताओं के साथ कार्यक्रम की तैयारियों पर चर्चा की है। कांग्रेस इस रैली को चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर बड़े जन आंदोलन के रूप में पेश करना चाहती है। इसके बाद चुनाव आयोग तक मार्च निकालकर अपनी मांगों को सामने रखने की योजना है।
दूसरी ओर, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) ने राहुल गांधी को पत्र लिखकर रैली की तारीख 10 नवंबर के बाद रखने की अपील की है। व्यापारियों का कहना है कि धनतेरस, दिवाली और भाई दूज के आसपास दिल्ली के बाजारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे समय में रैली के कारण यातायात में बदलाव, बैरिकेडिंग और रास्तों पर प्रतिबंध लगने से व्यापार प्रभावित हो सकता है। CTI के अनुसार, धनतेरस के दौरान दिल्ली में करीब 25,000 करोड़ रुपये का कारोबार होता है।
व्यापारियों ने यह भी आशंका जताई है कि रैली और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं के कारण कारोबार को करीब 10,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो सकता है। संगठन का दावा है कि अक्टूबर में हुए प्रदर्शनों और यातायात संबंधी परेशानियों के कारण व्यापारियों को पहले भी नुकसान उठाना पड़ा है। चांदनी चौक, सदर बाजार, चावड़ी बाजार और करोल बाग जैसे प्रमुख बाजारों में ग्राहकों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका जताई गई है। हालांकि, नुकसान से जुड़े ये आंकड़े व्यापारियों के अनुमान हैं।
अब कांग्रेस की रैली को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक तरफ कांग्रेस चुनावी प्रक्रिया और मतदाताओं के अधिकारों का मुद्दा उठाने की तैयारी में है, तो दूसरी तरफ व्यापारी त्योहारों के दौरान कारोबार पर पड़ने वाले असर को लेकर चिंतित हैं। ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि कांग्रेस अपने तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ती है या व्यापारियों की मांग को देखते हुए तारीख में बदलाव करती है।





