मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने पाकिस्तान की धरती से दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (SAARC) के शिखर सम्मेलन को फिर से आयोजित करने की मांग उठाई है। मुइज्जू का यह बयान ऐसे समय आया है, जब लंबे समय से SAARC का शिखर सम्मेलन नहीं हुआ है। इस मांग को दक्षिण एशिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
SAARC की स्थापना साल 1985 में हुई थी। इसका उद्देश्य दक्षिण एशिया के देशों के बीच आर्थिक विकास, व्यापार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपसी सहयोग को बढ़ावा देना है। इस संगठन में भारत, पाकिस्तान, मालदीव, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका और अफगानिस्तान शामिल हैं। हालांकि, भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण संगठन की गतिविधियां लंबे समय से प्रभावित हैं।
मुइज्जू को मालदीव में ‘इंडिया आउट’ अभियान से जोड़कर देखा जाता है। इस अभियान में मालदीव से भारतीय सैन्यकर्मियों की मौजूदगी खत्म करने की मांग उठाई गई थी। राष्ट्रपति बनने के बाद मुइज्जू ने भारत के साथ अपने देश के संबंधों में बदलाव की दिशा में कदम उठाए। बाद में दोनों देशों ने आपसी रिश्तों को बेहतर बनाने और सहयोग बढ़ाने की कोशिश भी की।
SAARC शिखर सम्मेलन की मांग के सामने सबसे बड़ी चुनौती भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव है। साल 2016 में उरी आतंकी हमले के बाद भारत ने इस्लामाबाद में होने वाले SAARC सम्मेलन में हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया था। इसके बाद सम्मेलन टल गया और अब तक इसका आयोजन नहीं हो सका है। भारत का रुख रहा है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।
मुइज्जू की इस मांग से एक बार फिर SAARC को सक्रिय करने और दक्षिण एशियाई देशों के बीच सहयोग बढ़ाने पर चर्चा शुरू हो सकती है। हालांकि, सम्मेलन का आयोजन तभी संभव होगा, जब सदस्य देशों के बीच सहमति बनेगी और भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में सुधार आएगा।





