आंध्र प्रदेश में शहरी निकाय चुनावों को लेकर उठे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम निर्देश दिया है। चुनाव में धांधली और उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोकने के आरोपों के बीच अदालत ने राज्य निर्वाचन आयोग को 26 अक्टूबर तक उम्मीदवारों की अंतिम सूची प्रकाशित नहीं करने का आदेश दिया। अदालत ने आयोग से शिकायतों की जांच कर निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए जरूरी कदम उठाने को कहा है।
यह मामला वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) की याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया। पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी की ओर से आरोप लगाया गया कि राज्य में कुछ उम्मीदवारों को नामांकन दाखिल करने से रोका गया। पार्टी ने यह भी दावा किया कि कुछ स्थानों पर उम्मीदवारों को डराया-धमकाया गया और उनके नामांकन पत्र छीनकर फाड़ दिए गए। इन आरोपों के आधार पर पार्टी ने नामांकन की समयसीमा बढ़ाने और उम्मीदवारों को सुरक्षा देने की मांग की।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने राज्य निर्वाचन आयोग को निर्देश दिया कि वह उम्मीदवारों की शिकायतों और उपलब्ध सबूतों की जांच करे। आयोग को यह तय करने के लिए कहा गया कि जिन उम्मीदवारों को हिंसा या कानून-व्यवस्था की समस्या के कारण नामांकन दाखिल करने का मौका नहीं मिला, क्या उन्हें अतिरिक्त समय दिया जाना चाहिए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि इस संबंध में फैसला प्रत्येक मामले के तथ्यों और सबूतों के आधार पर लिया जाना चाहिए।अदालत ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) को चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों और निर्वाचन कार्यालयों को पर्याप्त सुरक्षा उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष चुनाव के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि हर उम्मीदवार को बिना किसी डर या दबाव के चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लेने का अवसर मिलना चाहिए।
इस मामले में अब राज्य निर्वाचन आयोग की जांच और उसके फैसले पर नजर रहेगी। उम्मीदवारों को नामांकन से रोकने के आरोपों की जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष रहे और किसी भी उम्मीदवार को अनुचित तरीके से चुनाव लड़ने के अधिकार से वंचित न किया जाए।





