उद्घाटन से पहले लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे पर सवालसवालों से घिरे मंत्री, जवाब की जगह मीडिया पर हावी होने की कोशिश!

उत्तर प्रदेश के बहुप्रतीक्षित लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे को लेकर उद्घाटन से पहले ही विवाद खड़ा हो गया है। सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्टों में एक्सप्रेसवे के एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने के दावे सामने आए, जिसके बाद परियोजना की गुणवत्ता और निर्माण कार्य को लेकर सवाल उठने लगे।

इसी बीच जब इस मुद्दे पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री दिनेश प्रताप सिंह से सवाल पूछा गया, तो उनका कथित तौर पर नाराज़ होकर जवाब देना भी चर्चा का विषय बन गया। मंत्री ने कहा कि 13 जुलाई को मुख्यमंत्री और रक्षा मंत्री लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का उद्घाटन करेंगे। हालांकि, निर्माण की गुणवत्ता को लेकर उठ रहे सवालों पर उनकी प्रतिक्रिया को लेकर विपक्ष और कई लोगों ने आपत्ति जताई।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के पैसों से बनने वाली परियोजनाओं पर सवाल उठाना मीडिया और नागरिकों का अधिकार है। ऐसे में यदि किसी परियोजना में तकनीकी खामी या निर्माण संबंधी शिकायत सामने आती है, तो उसका जवाब तथ्यों और पारदर्शिता के साथ दिया जाना चाहिए। तीखी या नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया अक्सर विवाद को और बढ़ा देती है तथा लोगों के मन में और अधिक प्रश्न खड़े कर देती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता केवल उसके उद्घाटन से नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता, सुरक्षा और टिकाऊपन से तय होती है। इसलिए यदि किसी भी प्रकार की कमी की शिकायत सामने आती है, तो स्वतंत्र जांच कराकर तथ्य सार्वजनिक करना सबसे उचित कदम माना जाता है।

फिलहाल सरकार की ओर से उद्घाटन कार्यक्रम की तैयारियां जारी हैं। वहीं, एक्सप्रेसवे से जुड़े दावों और निर्माण की स्थिति को लेकर आधिकारिक स्पष्टीकरण तथा जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। ऐसे मामलों में जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे आलोचनाओं और सवालों का जवाब संयम, तथ्यों और जवाबदेही के साथ दें, ताकि जनता का भरोसा मजबूत बना रहे।