भारत ने 2047 तक अपनी परमाणु ऊर्जा क्षमता को 100 GW तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। फिलहाल देश की परमाणु क्षमता करीब 8.78 GW है और सरकार का लक्ष्य इसे 2031-32 तक लगभग 22 GW तक बढ़ाना है। इसके लिए बड़े परमाणु रिएक्टरों के साथ Small Modular Reactors यानी SMRs पर भी जोर दिया जा रहा है।
इसी बीच रूस की सरकारी परमाणु कंपनी Rosatom ने भारत के साथ परमाणु क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की पेशकश की है। रूस का प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब भारत अपनी बढ़ती बिजली जरूरतों, औद्योगिक विस्तार और कम-कार्बन ऊर्जा की मांग को पूरा करने के लिए परमाणु ऊर्जा को तेजी से बढ़ाना चाहता है।

SMRs इस रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों को अपेक्षाकृत छोटे स्थानों पर लगाया जा सकता है और इन्हें पुराने कोयला बिजली संयंत्रों की जगह, ऊर्जा-गहन उद्योगों तथा दूरदराज के क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की योजना है। भारत खुद भी BSMR-200 और SMR-55 जैसे स्वदेशी रिएक्टर विकसित कर रहा है और 2033 तक कम से कम पांच स्वदेशी SMRs को operational बनाने का लक्ष्य है।
रूस की पेशकश भारत के लिए तकनीक, निवेश और ऊर्जा सहयोग के नए अवसर खोल सकती है, लेकिन 100 GW का लक्ष्य आसान नहीं होगा। सरकार के रोडमैप में लगभग 46 GW क्षमता अन्य सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों, निजी क्षेत्र और joint ventures से आने की उम्मीद है। इसके लिए बड़े निवेश, मजबूत supply chain, तकनीकी क्षमता और तेज regulatory approvals जरूरी होंगे।

कुल मिलाकर, रूस की SMR पेशकश भारत की परमाणु महत्वाकांक्षा को गति दे सकती है, लेकिन भारत के लिए तकनीकी आत्मनिर्भरता और घरेलू SMR विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण रहेगा। अगर बड़े रिएक्टरों और स्वदेशी SMRs दोनों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाया जाता है, तो परमाणु ऊर्जा भारत की भविष्य की स्थिर और कम-कार्बन बिजली व्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा बन सकती है।




