आर्थिक संकट और भारी कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी जिम्मेदारी मिली है। पाकिस्तान को साल 2027 के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक समूह के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स का अध्यक्ष चुना गया है। साल 1953 के बाद यह पहला मौका है, जब पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी मिलने जा रही है। इसकी औपचारिक घोषणा 16 अक्टूबर को थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में आयोजित IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक के दौरान की गई।
पाकिस्तान के आर्थिक मामलों के मंत्री अहद खान चीमा को दोनों संस्थाओं के बोर्ड का आगामी अध्यक्ष घोषित किया गया है। वह विश्व बैंक में पाकिस्तान के गवर्नर भी हैं। पाकिस्तान सरकार ने इस फैसले को ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है। सरकार का कहना है कि इस जिम्मेदारी से पाकिस्तान को वैश्विक आर्थिक और विकास से जुड़े मुद्दों पर होने वाली चर्चाओं में अपनी बात रखने और सदस्य देशों के बीच बातचीत को बढ़ावा देने का अवसर मिलेगा।
हालांकि, पाकिस्तान को यह जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है, जब उसकी अर्थव्यवस्था कई चुनौतियों का सामना कर रही है। देश अपनी आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और सुधारों को आगे बढ़ाने के लिए IMF से वित्तीय सहायता ले रहा है। पाकिस्तान के पास IMF के दो प्रमुख सहायता कार्यक्रम हैं। इनमें 7 अरब डॉलर का एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी (EFF) कार्यक्रम और 1.4 अरब डॉलर का रेजिलिएंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी (RSF) कार्यक्रम शामिल हैं। इनका उद्देश्य आर्थिक स्थिति को मजबूत करना, वित्तीय सुधारों को आगे बढ़ाना और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी चुनौतियों का सामना करने की क्षमता बढ़ाना है।
पाकिस्तान को मिली इस जिम्मेदारी का मतलब यह नहीं है कि अब वह IMF या विश्व बैंक के कर्ज देने के फैसले खुद कर सकेगा। दोनों संस्थाओं के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स की अध्यक्षता मुख्य रूप से बैठकों की कार्यवाही और सदस्य देशों के बीच बातचीत से जुड़ी होती है। इससे पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी बात रखने का अधिक अवसर मिलेगा, लेकिन उसे कर्ज देने या आर्थिक सहायता मंजूर करने का विशेष अधिकार नहीं मिलेगा।
IMF और विश्व बैंक की वार्षिक बैठक 12 से 18 अक्टूबर तक बैंकॉक में आयोजित की जा रही है। इसमें 191 देशों के प्रतिनिधि, केंद्रीय बैंकों के प्रमुख, आर्थिक नीति निर्माता और अन्य अधिकारी शामिल हो रहे हैं। साल 2027 की वार्षिक बैठक अमेरिका की राजधानी वॉशिंगटन डीसी में आयोजित की जाएगी। ऐसे में पाकिस्तान के लिए यह जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी भूमिका मजबूत करने का अवसर है, लेकिन उसकी आर्थिक चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।





