नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य एक बार फिर सुर्खियों में है। हाल के दिनों में इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियों और तेल टैंकरों पर हमलों की घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के समुद्री मार्ग से होने वाले कच्चे तेल के बड़े हिस्से का परिवहन इसी रास्ते से होता है। ऐसे में यहां किसी भी प्रकार का तनाव वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है।
हालिया घटनाक्रम में अमेरिका ने ईरान के सैन्य ठिकानों और तटीय सैन्य ढांचे पर हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए की गई। दूसरी ओर ईरान ने इन हमलों को अपनी संप्रभुता का उल्लंघन बताते हुए कड़ी प्रतिक्रिया देने की चेतावनी दी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव और बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है, जिसका असर भारत सहित दुनिया भर के देशों पर पड़ सकता है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए इस क्षेत्र की स्थिति पर उसकी भी करीबी नजर बनी हुई है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है ताकि वैश्विक व्यापार, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय स्थिरता पर किसी बड़े संकट का खतरा टाला जा सके।




