देश में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बीच चुनाव आयोग में बड़े स्तर पर प्रशासनिक बदलाव किए गए हैं। मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में करीब 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों का तबादला किया गया है। इन बदलावों के बाद चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के कार्यकाल को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 और 2026 के दौरान कई राज्यों में मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को बदला गया। इनमें बिहार, नगालैंड, छत्तीसगढ़, जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, मणिपुर, लद्दाख, पंजाब, दिल्ली, गुजरात, सिक्किम और चंडीगढ़ जैसे क्षेत्र शामिल हैं। पश्चिम बंगाल और केरल में भी विधानसभा चुनाव के बाद अधिकारियों में बदलाव किया गया।
रिपोर्टों के मुताबिक, कुछ अधिकारियों को दो साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले ही दूसरी जिम्मेदारी दे दी गई। सामान्य तौर पर चुनाव से जुड़े अधिकारियों के काम में निरंतरता बनाए रखने के लिए उनके कार्यकाल को ध्यान में रखा जाता है। हालांकि, प्रशासनिक जरूरतों और चुनाव संबंधी परिस्थितियों के आधार पर तबादले किए जा सकते हैं।
चुनाव आयोग के मुख्यालय में भी वरिष्ठ अधिकारियों के स्तर पर बदलाव हुए हैं। उप निर्वाचन आयुक्त स्तर पर नई नियुक्तियां की गईं और कुछ अधिकारियों को दूसरी जिम्मेदारियां दी गईं। इन बदलावों के बीच आयोग की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हो रही है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। विपक्षी दलों ने इस प्रक्रिया की पारदर्शिता और मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची को सही और भरोसेमंद बनाना जरूरी है तथा पूरी प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार की जाती है।
ऐसे में चुनाव आयोग में हुए इन प्रशासनिक बदलावों और SIR की प्रक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आयोग मतदाता सूची को अपडेट करने के साथ पात्र मतदाताओं के अधिकारों और प्रक्रिया की पारदर्शिता को किस तरह सुनिश्चित करता है।





