परिसीमन बिल पर सियासी हलचल तेज, DMK की बैठक पर टिकी नजरें

परिसीमन बिल को लेकर देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। केंद्र सरकार की ओर से इस बिल को संसद में लाने की चर्चाओं के बीच तमिलनाडु की पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) ने 17 अक्टूबर को अपने सांसदों की अहम बैठक बुलाई है। इस बैठक की अध्यक्षता पार्टी प्रमुख एमके स्टालिन करेंगे। बैठक में लोकसभा के 22 और राज्यसभा के 8 सांसद शामिल होंगे। माना जा रहा है कि इसमें परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर भी चर्चा हो सकती है।

दरअसल, केंद्र सरकार इस महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने पर विचार कर रही है। इस सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पेश किए जाने की चर्चा है। हालांकि, विशेष सत्र की तारीख और विधेयकों को पेश करने को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। सरकार की कोशिश इन विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की बताई जा रही है।

परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व का नए सिरे से निर्धारण करना है। इस प्रक्रिया को लेकर दक्षिण भारत के कई राज्यों में चिंता है। उन्हें आशंका है कि आबादी के आधार पर सीटों का बंटवारा होने पर कम जनसंख्या वृद्धि वाले राज्यों का संसद में राजनीतिक प्रभाव कम हो सकता है। DMK पहले भी तमिलनाडु के हितों और संसद में राज्य के प्रतिनिधित्व की सुरक्षा की मांग उठा चुकी है।

इस बीच, DMK की बैठक को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि केंद्र सरकार को संवैधानिक संशोधन विधेयकों को पारित कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। सरकार के पास जरूरी संख्या जुटाने को लेकर राजनीतिक चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे में DMK का रुख महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, पार्टी परिसीमन बिल का समर्थन करेगी या विरोध, इस पर अंतिम फैसला सामने आना बाकी है।

वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने भी परिसीमन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण संवैधानिक बदलाव पर सभी राजनीतिक दलों से चर्चा होनी चाहिए। अब सबकी नजर DMK की बैठक और केंद्र सरकार के अगले कदम पर है। आने वाले दिनों में यह साफ हो सकता है कि विशेष सत्र बुलाया जाता है या नहीं और परिसीमन बिल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बन पाती है या नहीं।