भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि बदलते वैश्विक हालात में भारत अपनी ताकत बढ़ाने के साथ दूसरे देशों के साथ भरोसेमंद साझेदारियां भी बना रहा है। उन्होंने यह बात अबू धाबी में आयोजित रायसीना मिडिल ईस्ट संवाद के दौरान कही। जयशंकर ने जोर दिया कि दुनिया में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और बदलते हालात के बीच भारत को अपनी क्षमताओं को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को आगे बढ़ाना जरूरी है।
जयशंकर ने ‘द कॉन्टिनेंटल कॉरिडोर: हू कनेक्ट्स द हार्टलैंड?’ विषय पर आयोजित चर्चा में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि वैश्वीकरण को रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसके साथ आने वाली चुनौतियों का सामना करने के लिए देशों को अधिक मजबूत और तैयार रहना होगा। उनके अनुसार, दुनिया में प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और कई नए ऐसे रास्ते और बिंदु सामने आए हैं, जहां व्यापार और आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। ऐसे में देशों को अपनी ताकत और संसाधनों का समझदारी से इस्तेमाल करना होगा।
विदेश मंत्री ने भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय संपर्क और व्यापार को लेकर नई सोच को बढ़ावा दे रही है। इस गलियारे का उद्देश्य भारत, मध्य पूर्व और यूरोप के बीच परिवहन, व्यापार, ऊर्जा और डिजिटल संपर्क को बेहतर बनाना है। इससे भविष्य में विभिन्न क्षेत्रों के बीच आर्थिक सहयोग और व्यापार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
जयशंकर ने अपने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) दौरे के दौरान वहां के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत और UAE के बीच व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के साथ क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय हालात पर चर्चा की। इसके अलावा, उन्होंने जॉर्जिया की विदेश मंत्री माका बोचोरिश्विली से भी मुलाकात की। इस बैठक में व्यापार, पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दों पर बातचीत हुई।
जयशंकर के बयान से स्पष्ट है कि भारत बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपनी स्थिति मजबूत करने के साथ दूसरे देशों के साथ सहयोग को भी प्राथमिकता दे रहा है। भारत का प्रयास है कि मजबूत घरेलू क्षमताओं, बेहतर संपर्क व्यवस्था और भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों के जरिए आर्थिक विकास को आगे बढ़ाया जाए और वैश्विक चुनौतियों का सामना किया जाए।





