तिहाड़ जेल भेजे गए सौरव दास और आशुतोष रांका, सुप्रिया सुले ने गृह मंत्रालय से की रिहाई की मांग

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल भेजे जाने के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की सांसद सुप्रिया सुले ने दोनों नेताओं की गिरफ्तारी पर चिंता जताई है। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्रालय से इस मामले में हस्तक्षेप करने और दोनों को तुरंत रिहा कराने की मांग की है।

सुप्रिया सुले ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि जंतर-मंतर पर तिरंगा उठाना कोई अपराध नहीं है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेदों को अलग रखकर शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार की रक्षा करनी चाहिए। उनके अनुसार, लोकतंत्र में असहमति की महत्वपूर्ण भूमिका है और हर भारतीय को बिना किसी डर के अपनी बात रखने की आजादी मिलनी चाहिए।

दरअसल, 13 अक्टूबर को सौरव दास, आशुतोष रांका और उनके साथियों पर दिल्ली के जंतर-मंतर क्षेत्र में बैरिकेड पार करके बिना अनुमति प्रवेश करने का आरोप लगा था। पुलिस के अनुसार, जंतर-मंतर को अब निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटा दिया गया है। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाए। इस मामले में पुलिस ने सरकारी कर्मचारियों के काम में बाधा डालने, निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने और शांति बनाए रखने के बॉन्ड की शर्तें तोड़ने जैसे आरोप लगाए।

14 अक्टूबर को संबंधित मजिस्ट्रेट ने सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। इसके बाद दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया। वहीं, इसी मामले में हिरासत में लिए गए अजिंक्य शिंदे को निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए की गई है, जबकि CJP नेताओं के समर्थकों ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।

सुप्रिया सुले की मांग के बाद यह मामला शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन के अधिकार और कानून-व्यवस्था को लेकर चर्चा में आ गया है। उन्होंने गृह मंत्रालय से जल्द कार्रवाई करने की अपील की है। अब इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।