केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कोरोना महामारी के दौरान भारत को दूसरे देशों से पर्याप्त मदद नहीं मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा कि भारत ने मुश्किल समय में कई देशों की मदद की, लेकिन जब भारत को जरूरी दवाओं, मेडिकल उपकरणों और वैक्सीन की जरूरत थी, तब दूसरे देशों ने उसका पर्याप्त साथ नहीं दिया। उनके मुताबिक, इस अनुभव ने भारत को आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया।
पीयूष गोयल ने 14 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में यह बात कही। उन्होंने बताया कि कोरोना महामारी के दौरान वैश्विक सप्लाई चेन बाधित होने से भारत जैसे 140 करोड़ की आबादी वाले देश के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो गई थीं। भारत को अपनी जरूरतों के हिसाब से जरूरी सामान नहीं मिल पा रहा था, जिससे देश की निर्भरता और कमजोरियों का पता चला।
मंत्री ने कहा कि जब भारत ने व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE किट), कोविड जांच किट और वैक्सीन के लिए दूसरे देशों से संपर्क किया, तो उसे निराशा हाथ लगी। उन्होंने दावा किया कि जब भारत को फाइजर और मॉडर्ना की वैक्सीन की जरूरत थी, तब पश्चिमी देशों ने इन्हें भारत को उपलब्ध कराने में सहयोग नहीं किया। उनके अनुसार, भारत इन वैक्सीन को देश में लाने के लिए जरूरी शर्तों में छूट देने को भी तैयार था। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी आलोचना किसी एक देश के खिलाफ नहीं, बल्कि महामारी के दौरान सामने आई वैश्विक व्यवस्था की कमजोरियों को लेकर थी।
पीयूष गोयल ने कहा कि भारत ने महामारी के दौरान जरूरतमंद देशों को दवाएं और मेडिकल सामान उपलब्ध कराया। उन्होंने बताया कि भारत ने 100 से अधिक देशों को खाद्यान्न और वैक्सीन भी उपलब्ध कराए। उनके मुताबिक, भारत ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की भावना के साथ काम किया, लेकिन संकट के समय उसे दूसरे देशों से वैसा सहयोग नहीं मिला। इसी अनुभव के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत पर जोर दिया, ताकि भविष्य में देश जरूरी सामान के लिए दूसरे देशों पर पूरी तरह निर्भर न रहे।
मंत्री ने आगे कहा कि भारत दुनिया के साथ व्यापार और सहयोग बढ़ाना चाहता है, लेकिन इसके लिए भरोसेमंद साझेदारों का होना जरूरी है। भारत अब ऐसी सप्लाई चेन तैयार करने पर जोर दे रहा है, जिसमें जरूरी सामान की उपलब्धता बनी रहे और संकट के समय देश को परेशानी न हो। उन्होंने यह भी कहा कि भारत का लक्ष्य घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अवसरों का विस्तार करना है। सरकार की कोशिश है कि देश महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बने और दूसरे देशों के साथ भरोसे के आधार पर मजबूत संबंध भी बनाए रखे।





