अज़रबैजान की 96% आबादी मुस्लिम, फिर भी स्कूलों में हिजाब पहनने वाली छात्राओं को क्यों रोका जा रहा है? नए ड्रेस कोड पर बवाल

अज़रबैजान में स्कूलों के नए ड्रेस कोड को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। मुस्लिम बहुल इस देश में हिजाब पहनकर स्कूल पहुंचने वाली छात्राओं को प्रवेश से रोके जाने की खबरों के बाद विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। कई जगहों पर छात्राओं और शिक्षकों ने नए नियमों के खिलाफ आवाज उठाई है। इस विवाद ने धार्मिक स्वतंत्रता, शिक्षा के अधिकार और धर्मनिरपेक्षता को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

अज़रबैजान की लगभग 96 प्रतिशत आबादी खुद को मुस्लिम मानती है। इसके बावजूद देश का संविधान अज़रबैजान को धर्मनिरपेक्ष राज्य घोषित करता है। संविधान के अनुच्छेद 18 के अनुसार, धर्म राज्य से अलग है और सरकारी शिक्षा व्यवस्था धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए। वहीं, संविधान का अनुच्छेद 48 नागरिकों को अंतरात्मा और धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार भी देता है।

क्या है नया नियम?

विवाद की शुरुआत 21 सितंबर 2026 को हुई, जब अज़रबैजान की सरकार ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की वर्दी से जुड़े नियमों में संशोधन किया। नए प्रावधानों में ऐसे कपड़ों पर रोक लगाई गई है, जिन्हें निर्धारित ड्रेस कोड या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा के सिद्धांतों के विपरीत माना जाता है।

इस नियम में हिजाब का नाम लेकर स्पष्ट प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। हालांकि, इसके लागू होने के बाद कई स्कूलों में हिजाब पहनकर पहुंचने वाली छात्राओं को कथित तौर पर प्रवेश नहीं दिया गया। कुछ शिक्षकों को भी हेडस्कार्फ हटाने के लिए कहा गया।

सरकार का तर्क है कि एक समान ड्रेस कोड से स्कूलों में अनुशासन और धर्मनिरपेक्ष शैक्षणिक माहौल बनाए रखने में मदद मिलेगी। अधिकारियों के मुताबिक, सरकारी शिक्षण संस्थानों में निर्धारित वर्दी संबंधी नियमों का पालन जरूरी है।

छात्राओं और अभिभावकों का विरोध

नए नियमों के खिलाफ कई स्थानों पर प्रदर्शन हुए हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ छात्राओं को स्कूल के बाहर रोते हुए और शिक्षकों से गले मिलते हुए देखा गया। स्थानीय मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, कुछ स्कूलों में छात्राओं ने अपनी हिजाब पहनने वाली सहपाठियों के समर्थन में कक्षाओं का बहिष्कार भी किया।

प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी छात्रा को केवल सिर पर स्कार्फ पहनने के कारण शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि हिजाब पहनने से पढ़ाई या कक्षा में अनुशासन पर अपने आप कोई असर नहीं पड़ता।

इस विवाद के बीच पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों की भी खबरें सामने आई हैं। 12 अक्टूबर की रिपोर्टों में ड्रेस कोड लागू करने से जुड़े घटनाक्रमों के सिलसिले में 37 लोगों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई।

धर्मनिरपेक्षता बनाम धार्मिक स्वतंत्रता

इस विवाद का मुख्य सवाल यह है कि क्या धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए धार्मिक प्रतीकों या कपड़ों पर प्रतिबंध जरूरी है। सरकार की ओर से नियमों को समान ड्रेस कोड और धर्मनिरपेक्षता से जोड़कर देखा जा रहा है, जबकि आलोचकों का कहना है कि इनका इस्तेमाल छात्राओं की धार्मिक स्वतंत्रता सीमित करने के लिए नहीं होना चाहिए।

अज़रबैजान में यह बहस इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि संविधान एक ओर धर्मनिरपेक्ष शिक्षा व्यवस्था की बात करता है, तो दूसरी ओर धार्मिक स्वतंत्रता और शिक्षा के अधिकार की भी गारंटी देता है।

फिलहाल, हिजाब को लेकर विवाद जारी है। नए नियमों को किस तरह लागू किया जाएगा और क्या सरकार छात्राओं की चिंताओं पर कोई बदलाव करेगी, इस पर सबकी नजर है।