दिल्ली जिमखाना क्लब विवाद: आखिर क्यों देश के सबसे प्रतिष्ठित क्लब पर मंडरा रहा है बेदखली का संकट?

नई दिल्ली: देश के सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक क्लबों में शामिल दिल्ली जिमखाना क्लब इन दिनों कानूनी विवाद के केंद्र में है। केंद्र सरकार ने क्लब को उसकी जमीन से बेदखल करने की प्रक्रिया शुरू की है। सरकार का कहना है कि क्लब की लीज समाप्त हो चुकी है और अब वह सरकारी भूमि पर अनधिकृत रूप से कब्जा किए हुए है। वहीं क्लब प्रबंधन और उसके सदस्यों ने इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए अदालत का दरवाजा खटखटाया है।

क्या है पूरा मामला?दिल्ली के लुटियंस क्षेत्र स्थित सफदरजंग रोड पर फैला लगभग 27.3 एकड़ का दिल्ली जिमखाना क्लब वर्षों से देश के प्रभावशाली अधिकारियों, सैन्य अधिकारियों, न्यायपालिका, राजनेताओं और अन्य विशिष्ट सदस्यों का प्रमुख सामाजिक एवं खेल केंद्र रहा है। केंद्र सरकार का दावा है कि क्लब की भूमि की लीज समाप्त हो चुकी है, इसलिए उसे परिसर खाली करना होगा। इसके लिए भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) ने क्लब को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।क्लब पहुंचा हाई कोर्टसरकारी कार्रवाई के खिलाफ दिल्ली जिमखाना क्लब और उसके कर्मचारियों के संगठन ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि बेदखली की कार्रवाई उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना शुरू की गई है। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा और फिलहाल बेदखली की प्रक्रिया पर तत्काल कार्रवाई टालने का निर्देश दिया है।ऐतिहासिक महत्वदिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना मूल रूप से वर्ष 1913 में “इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब” के रूप में हुई थी। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। यह क्लब लंबे समय से राजधानी के सबसे प्रतिष्ठित सामाजिक संस्थानों में गिना जाता है और यहां खेल, सांस्कृतिक तथा सामाजिक गतिविधियों का आयोजन होता रहा है।

आगे क्या?अब इस पूरे मामले पर सभी की नजर दिल्ली हाई कोर्ट की सुनवाई और केंद्र सरकार के अगले कदम पर टिकी है। यदि अदालत सरकार के पक्ष में फैसला देती है तो क्लब को परिसर खाली करना पड़ सकता है। वहीं यदि क्लब को राहत मिलती है तो बेदखली की प्रक्रिया पर रोक लग सकती है। फिलहाल मामला न्यायिक विचाराधीन है और अंतिम निर्णय आना बाकी है।