अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए कर्मचारियों के सत्यापन की प्रक्रिया सख्त की जा रही है। अब राम मंदिर में काम करने वाले हर कर्मचारी का 100 फीसदी पुलिस वेरिफिकेशन कराया जाएगा। इसके साथ ही कर्मचारियों के लिए पुलिस की ओर से जारी कैरेक्टर सर्टिफिकेट यानी चरित्र प्रमाण पत्र देना भी अनिवार्य किया गया है।
नई व्यवस्था के तहत कर्मचारियों से केवल उनकी व्यक्तिगत जानकारी ही नहीं ली जाएगी, बल्कि उनके परिवार और करीबी रिश्तेदारों से जुड़ी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। इसके जरिए मंदिर प्रशासन कर्मचारियों की पहचान और उनकी पृष्ठभूमि से जुड़ी जानकारी का पूरा रिकॉर्ड तैयार करेगा। अधिकारियों के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करना है।
यह कदम मंदिर में कर्मचारियों और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों की समीक्षा के बीच उठाया गया है। जून 2026 में मंदिर में चढ़ावे की चोरी का मामला सामने आया था। पुलिस ने इस मामले में आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था और जांच के दौरान बड़ी मात्रा में नकदी बरामद होने की जानकारी सामने आई थी। इसके बाद मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और कर्मचारियों की निगरानी को लेकर कई स्तरों पर समीक्षा की जा रही है।
कर्मचारियों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया मंदिर के नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में आगे बढ़ाई जा रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारियों की पहचान, पुलिस सत्यापन, चरित्र प्रमाण पत्र और पारिवारिक विवरण को महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।
राम मंदिर प्रशासन का जोर अब सुरक्षा के साथ-साथ कर्मचारियों की जवाबदेही और व्यवस्थित रिकॉर्ड तैयार करने पर भी है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद मंदिर में काम करने वाले कर्मचारियों को तय प्रक्रिया के तहत अपना पुलिस वेरिफिकेशन और चरित्र प्रमाण पत्र उपलब्ध कराना होगा। साथ ही परिवार से जुड़ी जरूरी जानकारी भी प्रशासन को देनी होगी।





