पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में कथित दुष्कर्म की शिकार नाबालिग बच्ची की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस जांच के अनुसार, बच्ची के लापता होने के एक दिन बाद उसका शव एक तालाब से बरामद किया गया। प्रारंभिक पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में उसके साथ यौन उत्पीड़न, गंभीर शारीरिक हिंसा और सिर पर गहरी चोटों के संकेत मिले हैं। रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बच्ची को कथित तौर पर बोरे में डालकर तालाब में फेंका गया था, जबकि वह उस समय जीवित थी।
जानकारी के अनुसार, बच्ची अपने एक मित्र के जन्मदिन के लिए उपहार खरीदने घर से निकली थी, लेकिन वापस नहीं लौटी। परिजनों द्वारा गुमशुदगी की सूचना देने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। अगले दिन उसका शव बरामद होने से पूरे इलाके में आक्रोश फैल गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मुख्य आरोपी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
इस दर्दनाक घटना के बाद स्थानीय लोगों ने विरोध प्रदर्शन किए और आरोप लगाया कि यदि गुमशुदगी की शिकायत मिलने के तुरंत बाद प्रभावी कार्रवाई की जाती, तो शायद बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। पीड़िता के परिवार ने भी पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया पर सवाल उठाए हैं।

इस घटना ने एक बार फिर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है। राजनीतिक दलों ने भी मामले को लेकर एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाए हैं, जबकि राज्य सरकार ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और त्वरित न्याय का आश्वासन दिया है।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। फोरेंसिक साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर चार्जशीट तैयार की जा रही है। पूरे देश की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि इस जघन्य अपराध के दोषियों को जल्द से जल्द कानून के तहत कड़ी सजा मिले और पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके।




