वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से जुड़े 25 वर्षीय शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे मामले की परिस्थितियों को लेकर पुलिस की पड़ताल और गहरी हो गई है। 25 सितंबर को गुरु कृपा कुंज आश्रम की चौथी मंजिल से गिरने के बाद दीपक की मौत हो गई थी। पुलिस फिलहाल इसे प्रथम दृष्टया आत्महत्या मानकर जांच कर रही है, लेकिन मौत से पहले की घटनाओं और कमरे में मिले साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक, दीपक लोधी मूल रूप से मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले थे। करीब दो साल पहले उन्होंने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी, जिसके बाद उनका नाम रसिक दुलारी शरण बताया गया। वह वृंदावन में रहकर आश्रम से जुड़े कार्यों में लगे हुए थे। 25 सितंबर की सुबह करीब 10:30 बजे वह चौथी मंजिल की छत से नीचे गिर गए। उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
जांच में सामने आया कि पुलिस ने आश्रम परिसर और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली है। फुटेज के अनुसार, दीपक करीब 10:25 बजे अपने कमरे से बाहर निकले। रिपोर्टों के मुताबिक, उस समय उनके कपड़ों पर खून के निशान दिखाई दे रहे थे। इसके बाद वह चौथी मंजिल की छत पर पहुंचे, कुछ समय वहां बैठे और फिर कुछ सेकंड के लिए लेट गए। करीब 10:36 बजे वह उठे और छत से नीचे गिर गए। इस फुटेज के आधार पर पुलिस आत्महत्या की आशंका जता रही है।
मामले में सबसे अहम सवाल उनके कमरे से मिले ग्राइंडर को लेकर है। पुलिस को कमरे की तलाशी के दौरान एक टाइल या पत्थर काटने वाली ग्राइंडर मशीन मिली। जांचकर्ताओं के अनुसार, दीपक के प्राइवेट पार्ट पर गंभीर चोट और कटने के निशान भी सामने आए हैं। हालांकि यह चोट कब और कैसे लगी, इसका मौत से क्या संबंध है और क्या ग्राइंडर का इससे कोई संबंध था, इन सवालों का अभी पुलिस ने अंतिम जवाब नहीं दिया है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर कई चोटों का उल्लेख किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, सिर, पसली और पैर समेत शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चोटें मिलीं और अत्यधिक रक्तस्राव को मौत का कारण बताया गया। पुलिस अधिकारियों ने यह भी कहा है कि अत्यधिक रक्तस्राव गिरने से लगी चोटों के कारण हुआ या उससे पहले लगी किसी चोट से, इसे स्पष्ट करने के लिए विशेषज्ञ और फोरेंसिक जांच जरूरी है।
जांच का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा दीपक का मोबाइल फोन है। पुलिस ने फोन को फोरेंसिक जांच के लिए भेजा है। अधिकारियों की नजर डिलीट किए गए चैट, फोटो, वीडियो और दूसरी डिजिटल सामग्री पर है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि मौत से पहले दीपक किन लोगों के संपर्क में थे और उस समय उनकी परिस्थितियां क्या थीं। अभी तक ऐसी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है जिससे मौत की वजह या कथित आत्महत्या के पीछे का कारण निश्चित रूप से स्थापित हो सके।
पुलिस आश्रम में मौजूद लोगों और दीपक के संपर्क में रहने वाले अन्य लोगों से भी पूछताछ कर रही है। कुछ रिपोर्टों में बताया गया है कि वृंदावन के संत समाज के लोगों ने भी मामले की विस्तृत जांच की मांग की है। हालांकि, पुलिस की जांच में अभी तक किसी व्यक्ति के खिलाफ हत्या या साजिश का आरोप साबित नहीं हुआ है।
फिलहाल जांचकर्ताओं के सामने मुख्य सवाल यही है कि दीपक के कमरे से निकलने से पहले वास्तव में क्या हुआ था। सीसीटीवी फुटेज उनकी आखिरी गतिविधियों की समय-रेखा सामने रखती है, जबकि ग्राइंडर, शरीर पर मिली गंभीर चोटें और मोबाइल से डिलीट डेटा की संभावित रिकवरी उस समय की परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण हो सकती है। पुलिस फोरेंसिक रिपोर्ट और डिजिटल जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई कर रही है।





