भारत में सुरक्षा एजेंसियों की जांच में पाकिस्तान से जुड़े एक कथित आतंकी नेटवर्क तक युवाओं की ऑनलाइन पहुंच का एक नया पैटर्न सामने आया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, Instagram Reels और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए युवाओं को आकर्षित किया गया और बाद में निजी संदेशों के माध्यम से उनसे संपर्क बढ़ाया गया। हालिया जांच में गुजरात के दो युवकों के मामले सामने आए हैं, जिन्हें एजेंसियों ने पाकिस्तानी आतंकवादी शाहजाद भट्टी से जुड़े नेटवर्क तक पहुंचने वाला बताया है।
NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात के 29 वर्षीय एक जिम ट्रेनर ने करीब डेढ़ से दो साल तक भट्टी को Instagram पर फॉलो किया। उसका कहना है कि वह भट्टी को सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर समझता था। बाद में दोनों के बीच सीमित ऑनलाइन बातचीत हुई। दूसरे मामले में गुजरात के 19 वर्षीय कपड़ा दुकान कर्मचारी ने Instagram Reels देखते हुए ऐसे कंटेंट पर ध्यान दिया, जिसमें कथित तौर पर पैसे, महंगी कारों और लग्जरी लाइफस्टाइल का आकर्षक चित्रण किया जाता था।
जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस तरह का संपर्क एक चरणबद्ध प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है। पहले सोशल मीडिया पर किसी व्यक्ति की पोस्ट, Reel या कमेंट के जरिए पहचान की जाती है, फिर निजी संदेशों के माध्यम से संपर्क बढ़ाया जाता है और इसके बाद कथित तौर पर पैसे या बेहतर जीवनशैली का लालच दिया जाता है। एजेंसियों का आरोप है कि कुछ मामलों में युवाओं को छोटे काम सौंपे गए और बाद में उन्हें अधिक गंभीर गतिविधियों की ओर ले जाने की कोशिश की गई।
इसी नेटवर्क की जांच में सुरक्षा एजेंसियों ने सोशल मीडिया गतिविधियों को अहम सुराग माना है। Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो वर्षों में उत्तर प्रदेश, पंजाब, राजस्थान, दिल्ली और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में ऐसे युवाओं के मामले सामने आए हैं, जिनके बारे में एजेंसियों का दावा है कि उन्हें सोशल मीडिया के जरिए नेटवर्क से जोड़ा गया। रिपोर्ट में आरोप है कि कुछ लोगों को शुरुआत में छोटे कामों के लिए भुगतान किया गया और बाद में कथित तौर पर निगरानी तथा हिंसक गतिविधियों से जुड़े काम सौंपे गए।
सोशल मीडिया के इस्तेमाल की बात केवल भट्टी नेटवर्क की जांच तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल STF की एक अलग जांच में भी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान से जुड़े संदिग्ध Jaish नेटवर्क ने Instagram और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए युवाओं से संपर्क बनाया। इस मामले में झारखंड की एक महिला को भी गिरफ्तार किया गया है और जांचकर्ताओं ने उसके Instagram चैट को डिजिटल साक्ष्य के रूप में देखा है। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों का अंतिम निर्धारण अदालत की प्रक्रिया से होना बाकी है।
केंद्र सरकार ने 16 सितंबर 2026 को शाहजाद भट्टी नेटवर्क को UAPA के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया। गृह मंत्रालय के मुताबिक, नेटवर्क पर हथियारों, विस्फोटकों और नशीले पदार्थों की तस्करी के साथ युवाओं और छोटे अपराधों में शामिल लोगों को आतंकवाद की ओर उकसाने का आरोप है। सरकार ने यह भी कहा कि नेटवर्क ने डिजिटल माध्यमों का इस्तेमाल किया।
भारत की राष्ट्रीय आतंकवाद-रोधी नीति में भी सोशल मीडिया और इंस्टेंट मैसेजिंग प्लेटफॉर्म को आतंकवादी संगठनों द्वारा प्रचार, संचार, फंडिंग और हमलों के निर्देशन के संभावित माध्यमों के रूप में चिन्हित किया गया है। हालांकि, किसी व्यक्ति का केवल किसी संदिग्ध अकाउंट को फॉलो करना या उसकी Reel देखना अपने आप में आतंकी गतिविधि का प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्रत्येक मामले में डिजिटल बातचीत, इरादा, गतिविधियों और अन्य साक्ष्यों की जांच जरूरी होती है।
फिलहाल भट्टी से जुड़े नेटवर्क की जांच जारी है। सुरक्षा एजेंसियां सोशल मीडिया अकाउंट्स, निजी संदेशों, संभावित हैंडलर्स, पैसों के लेनदेन और कथित भर्ती प्रक्रिया के बीच संबंधों की जांच कर रही हैं। पाकिस्तान की ओर से पहले इन आरोपों को खारिज करते हुए भारत के दावों को बेबुनियाद बताया गया है।





