भारत में सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग के सामने सप्लाई-चेन सिक्योरिटी की चुनौती

सेमीकंडक्टर आज स्मार्टफोन, ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिफेंस और डेटा सेंटर जैसी लगभग हर आधुनिक तकनीक की बुनियाद बन चुके हैं। ऐसे में इनकी सप्लाई में किसी भी तरह का व्यवधान सीधे अर्थव्यवस्था और रणनीतिक क्षेत्रों को प्रभावित कर सकता है। भारत के लिए चुनौती सिर्फ देश में चिप बनाने की क्षमता विकसित करना नहीं, बल्कि पूरी सप्लाई चेन को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना भी है। वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग कुछ प्रमुख देशों और क्षेत्रों में काफी केंद्रित है। ताइवान अकेले वैश्विक चिप उत्पादन का 60 प्रतिशत से अधिक और एडवांस्ड चिप्स का करीब 90 प्रतिशत उत्पादन करता है। इसके अलावा सेमीकंडक्टर निर्माण के लिए जरूरी उपकरण, विशेष रसायन, गैस, वेफर और अन्य सामग्रियों की सप्लाई भी अलग-अलग देशों पर निर्भर है। यही वैश्विक निर्भरता किसी भू-राजनीतिक तनाव, व्यापार प्रतिबंध या प्राकृतिक आपदा की स्थिति में सप्लाई-चेन को प्रभावित कर सकती है।

भारत ने इस जोखिम को कम करने के लिए घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करने पर जोर बढ़ाया है। जुलाई 2026 में मंजूर Semicon 2.0 के लिए ₹1,27,500 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसका फोकस केवल फैब लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि चिप डिजाइन, सेमीकंडक्टर मशीनरी और मटेरियल, एडवांस्ड पैकेजिंग, रिसर्च और कुशल मानव संसाधन को मजबूत करना भी है। सरकार के अनुसार, अब तक 12 सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिल चुकी है, जिनमें ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश की प्रतिबद्धता है और तीन परियोजनाओं में कमर्शियल प्रोडक्शन शुरू हो चुका है।

फिर भी भारत के सामने कई चुनौतियां हैं—उन्नत तकनीक और उपकरणों की उपलब्धता, कच्चे माल और विशेष गैसों की सुरक्षित सप्लाई, कुशल तकनीकी कर्मचारियों की जरूरत और वैश्विक कंपनियों पर तकनीकी निर्भरता। इसलिए भारत के लिए मजबूत सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन का मतलब सिर्फ “Made in India chips” नहीं, बल्कि डिजाइन से लेकर मटेरियल, निर्माण, टेस्टिंग और पैकेजिंग तक एक भरोसेमंद घरेलू इकोसिस्टम तैयार करना है। अगर भारत इस पूरी वैल्यू चेन में अपनी क्षमता बढ़ाता है, तो इससे आयात पर निर्भरता और बाहरी सप्लाई झटकों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है। साथ ही, यह ऑटोमोबाइल, टेलीकॉम, डिफेंस, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे रणनीतिक क्षेत्रों के लिए अधिक resilient supply chain बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।