ट्रंप से जुड़ी कंपनी के साथ डील, Guardian-1 एंटी-ड्रोन के लिए भारतीय कंपनी को लाइसेंस

भारतीय रक्षा कंपनी पारस डिफेंस एंड स्पेस टेक्नोलॉजीज ने अमेरिका की टैंडम डिफेंस LLC के साथ Guardian-1 एंटी-ड्रोन सिस्टम को लेकर एक अहम समझौता किया है। इस समझौते के तहत पारस डिफेंस को भारत में Guardian-1 तकनीक के निर्माण और इसके व्यावसायिक इस्तेमाल का विशेष लाइसेंस मिला है। यह समझौता 30 जून 2026 को हुआ था। लाइसेंस की शुरुआती अवधि 12 महीने रखी गई है, जिसे दोनों कंपनियों की सहमति से आगे बढ़ाया जा सकता है।

Guardian-1 एक हाई-स्पीड और बैटरी से चलने वाला काउंटर-ड्रोन सिस्टम है, जिसे दुश्मन के ड्रोन को हवा में रोकने और नष्ट करने के लिए तैयार किया गया है। मौजूदा समय में ड्रोन का इस्तेमाल निगरानी के साथ-साथ हमलों के लिए भी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में एंटी-ड्रोन सिस्टम सुरक्षा बलों के लिए काफी अहम हो गए हैं। कंपनी के अनुसार, Guardian-1 को Shahed-136 और Geran-2 जैसे एकतरफा हमले वाले ड्रोन से निपटने के लिए डिजाइन किया गया है।

इस समझौते के तहत पारस डिफेंस भारत में Guardian-1 तकनीक का इस्तेमाल करके सिस्टम का निर्माण और व्यावसायिक बिक्री कर सकेगी। इससे भारत में काउंटर-ड्रोन तकनीक के स्थानीय निर्माण को बढ़ावा मिल सकता है और विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। यह डील ऐसे समय हुई है जब भारत अपनी रक्षा जरूरतों में स्वदेशी तकनीक और आधुनिक एंटी-ड्रोन क्षमताओं पर लगातार जोर दे रहा है।

इस डील को लेकर चर्चा इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि टैंडम डिफेंस की पैरेंट कंपनी Powerus से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बेटे डोनाल्ड ट्रंप जूनियर और एरिक ट्रंप निवेशकों के तौर पर जुड़े हुए हैं। हालांकि, कंपनी की ओर से कहा गया है कि ट्रंप परिवार से जुड़े निवेशक कंपनी के रोजाना के संचालन या उसके कॉन्ट्रैक्ट हासिल करने की प्रक्रिया में शामिल नहीं हैं।

Powerus की ओर से पाकिस्तान के साथ भी ड्रोन और मानवरहित सिस्टम से जुड़े समझौते किए जाने की खबरें सामने आई हैं। वहीं, भारत के साथ हुई डील में Guardian-1 के निर्माण और व्यावसायीकरण के अधिकार स्पष्ट रूप से दिए गए हैं। हालांकि, अभी तक भारतीय सशस्त्र बलों की ओर से Guardian-1 की खरीद का कोई आधिकारिक ऑर्डर सामने नहीं आया है।

भारत के लिए इस समझौते का महत्व इसलिए भी है क्योंकि आधुनिक युद्ध में छोटे और कम लागत वाले ड्रोन से पैदा होने वाले खतरे तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे खतरों से निपटने के लिए तेज और प्रभावी एंटी-ड्रोन सिस्टम की जरूरत बढ़ रही है। Guardian-1 के लिए मिला यह लाइसेंस भारत में इस तरह की तकनीक के निर्माण और उपलब्धता को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।