SASTRA जमीन विवाद पर सुप्रीम कोर्ट सख्त

तमिलनाडु के तंजावुर में SASTRA यूनिवर्सिटी और राज्य सरकार के बीच करीब 31.37 एकड़ सरकारी जमीन को लेकर विवाद चल रहा है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान तमिलनाडु सरकार से कहा कि यूनिवर्सिटी को हटाने और मौजूदा इमारतों को गिराने के बजाय ओपन-एयर जेल के लिए किसी दूसरी उपयुक्त जमीन पर भी विचार किया जा सकता है।

राज्य सरकार ने इस जमीन को जेल विभाग के लिए आवंटित किया था। सरकार का आरोप है कि SASTRA यूनिवर्सिटी ने इस जमीन पर कब्जा किया है। इसी आधार पर यूनिवर्सिटी को जमीन खाली करने का निर्देश दिया गया था। मद्रास हाई कोर्ट ने भी जनवरी 2026 में सरकार के पक्ष को बरकरार रखते हुए जमीन खाली करने का आदेश दिया था। इसके बाद SASTRA ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की।

सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने साफ किया कि अदालत कथित अतिक्रमण को सही नहीं ठहरा रही है। हालांकि, कोर्ट ने इस बात पर भी ध्यान दिलाया कि यहां एक शैक्षणिक संस्थान चल रहा है और बड़ी संख्या में छात्र पढ़ रहे हैं। अदालत ने सुझाव दिया कि अगर सरकार को ओपन-एयर जेल के लिए जमीन चाहिए तो वह किसी दूसरी जगह का विकल्प तलाश सकती है। जरूरत पड़ने पर उस जमीन की लागत यूनिवर्सिटी से वसूली जा सकती है।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी समाधान से तमिलनाडु सरकार को आर्थिक या जमीन का नुकसान नहीं होना चाहिए। CJI सूर्यकांत ने भरोसा दिलाते हुए कहा कि राज्य का जमीन का एक इंच भी नुकसान नहीं होने दिया जाएगा। वहीं तमिलनाडु सरकार ने वैकल्पिक जमीन के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई और कहा कि इससे सरकारी जमीन पर कब्जे को गलत संदेश मिल सकता है। अब राज्य सरकार को मामले पर आगे विचार करने के लिए समय दिया गया है।