TMC नाम-सिंबल विवाद: ममता गुट को ‘फुटबॉल खिलाड़ी’, अरूप राय गुट को ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह

तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहे विवाद में चुनाव आयोग ने दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को अलग-अलग नाम और चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिए हैं। शुक्रवार को जारी आदेश के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ चुनाव चिन्ह दिया गया है। वहीं अरूप राय के नेतृत्व वाले गुट को ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है।यह फैसला चुनाव आयोग के उस अंतरिम आदेश के एक दिन बाद आया है, जिसमें दोनों गुटों को ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और पार्टी के पारंपरिक ‘फूल और घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिन्ह का इस्तेमाल करने से रोक दिया गया था। आयोग ने कहा था कि दोनों पक्ष पार्टी के नाम और पहचान पर अपना दावा कर रहे हैं, इसलिए अंतिम फैसला होने तक अलग-अलग पहचान के साथ आगामी उपचुनाव कराना जरूरी है।

चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से नए नामों और उपलब्ध चुनाव चिन्हों के तीन-तीन विकल्प मांगे थे। ममता बनर्जी के गुट ने ‘ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ समेत तीन नाम सुझाए थे और चुनाव चिन्ह के लिए ‘फुटबॉल खिलाड़ी’ तथा क्रिकेट बैट जैसे विकल्प रखे थे। आयोग ने अंततः फुटबॉल खिलाड़ी का चिन्ह आवंटित किया।

अरूप राय गुट की ओर से भी तीन नाम और तीन चुनाव चिन्ह के विकल्प दिए गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, इस गुट ने ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ को नाम के विकल्पों में रखा था, जबकि चुनाव चिन्ह के लिए ब्लैकबोर्ड, लिफाफा और मशाल जैसे विकल्प सुझाए थे। आयोग ने ‘डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘लिफाफा’ चिन्ह को मंजूरी दी।यह अंतरिम व्यवस्था पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले 6 अक्टूबर के उपचुनावों के लिए लागू होगी। दोनों गुटों ने इन सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं और अब उनके उम्मीदवार अलग-अलग पार्टी नाम और चुनाव चिन्ह के तहत चुनाव लड़ेंगे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि मूल ‘ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस’ नाम और ‘फूल और घास’ चुनाव चिन्ह को लेकर अंतिम फैसला अभी बाकी है।

आयोग के आदेश के मुताबिक, यह व्यवस्था स्थायी रूप से पार्टी के नियंत्रण या वैधता पर अंतिम फैसला नहीं है। TMC के नाम और चुनाव चिन्ह पर दोनों गुटों के दावों की अंतिम सुनवाई चुनाव चिन्ह आदेश के पैरा 15 के तहत जारी रहेगी। तब तक दोनों पक्ष आगामी उपचुनावों में आयोग द्वारा आवंटित अलग-अलग पहचान का इस्तेमाल करेंगे।