हमें मजबूर मत कीजिए…’, राहत शिविरों में मौतों पर सुप्रीम कोर्ट की मणिपुर सरकार को फटकार

मणिपुर में जातीय हिंसा के बाद बनाए गए राहत शिविरों की स्थिति और वहां हुई मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अदालत ने राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुविधाओं और स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर चिंता जताई है। यह मामला उन लोगों से जुड़ा है जो 2023 में शुरू हुई हिंसा के बाद अपने घरों से विस्थापित हुए और लंबे समय से राहत शिविरों में रह रहे हैं। जनवरी 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने 14 राहत शिविरों में भोजन, चिकित्सा सुविधाओं और अन्य कमियों की जांच के लिए जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली समिति से रिपोर्ट मांगी थी।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि राहत शिविरों में रहने वाले लोगों को पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल रही हैं और कुछ मामलों में लोगों की मौत भी हुई है। इसी संदर्भ में पीठ ने राज्य प्रशासन की जिम्मेदारी को लेकर सख्त रुख अपनाया और कहा कि अदालत को ऐसी स्थिति में हस्तक्षेप करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। अदालत की टिप्पणी का केंद्र राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित नागरिकों की बुनियादी जरूरतों और चिकित्सा सहायता की उपलब्धता रहा।

मणिपुर में मई 2023 से शुरू हुई हिंसा में बड़े पैमाने पर लोग विस्थापित हुए हैं। हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक हिंसा में कम से कम 306 लोगों की मौत और 49 लोगों के लापता होने की जानकारी विधानसभा में दी गई। विस्थापन का असर अब भी जारी है और हजारों लोग राहत शिविरों या अस्थायी ठिकानों में रह रहे हैं।

राहत शिविरों की व्यवस्था को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहले भी कई बार निर्देश दे चुका है। अगस्त 2023 में अदालत ने स्पष्ट किया था कि शिविरों में भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए और गंभीर रूप से बीमार लोगों को जरूरत पड़ने पर सेना या अन्य उपयुक्त अस्पतालों में इलाज की व्यवस्था दी जाए।

जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस गीता मित्तल की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय समिति से 14 राहत शिविरों में सुविधाओं की कथित कमी की जांच कर रिपोर्ट देने को कहा था। याचिका में भोजन और चिकित्सा सुविधाओं की कमी सहित कई समस्याओं का उल्लेख किया गया था। अदालत ने समिति से जल्द से जल्द, व्यावहारिक रूप से दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने का अनुरोध किया था।

अगस्त 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने हिंसा से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास से जुड़ी शिकायतों पर हाई-पावर्ड कमेटी को जांच करने का निर्देश दिया था। अदालत के सामने यह शिकायत रखी गई थी कि कई परिवारों को अब तक पुनर्वास और क्षतिग्रस्त मकानों के पुनर्निर्माण का लाभ नहीं मिला है। अदालत ने समिति से शिकायतों की पुष्टि कर स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा था।

मणिपुर में हिंसा के तीन साल से अधिक समय बाद भी राहत, पुनर्वास और लोगों की सुरक्षित वापसी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट की ताजा कार्रवाई में राहत शिविरों में रहने वाले विस्थापित लोगों की स्थिति और उन्हें मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं पर प्रशासन से जवाबदेही तय करने पर जोर दिखाई देता है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से राहत शिविरों में सुविधाओं और मौतों से जुड़े तथ्यों पर विस्तृत जानकारी अदालत के सामने रखी जाएगी।