900 मीटर का सुरक्षा घेरा, फिर भी घरों से कुछ मीटर दूर IAF का गोला-बारूद डिपो

गुरुग्राम में भारतीय वायुसेना (IAF) के पुराने गोला-बारूद डिपो के आसपास बना 900 मीटर का प्रतिबंधित क्षेत्र अब गंभीर सवालों के घेरे में है। जिस इलाके को सुरक्षा कारणों से लंबे समय से निर्माण और शहरीकरण से दूर रखने का नियम था, वहां अब बड़ी संख्या में मकान, दुकानें और बहुमंजिला इमारतें खड़ी हो चुकी हैं। कई जगहों पर घर डिपो की चारदीवारी से महज कुछ मीटर की दूरी पर हैं और कहीं-कहीं यह दूरी 9 मीटर से भी कम बताई गई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 2,325 एकड़ में फैले इस 900 मीटर के क्षेत्र में पिछले वर्षों के दौरान लगभग 15 अवैध कॉलोनियां विकसित हो गईं। शीटला कॉलोनी, राजीव नगर, संजय ग्राम, सुखराली एन्क्लेव, अशोक विहार फेज-3, ओम विहार, धरम कॉलोनी, अमनपुरा और कार्टरपुरी जैसे इलाकों में घरों के साथ PG, दुकानें, स्कूल, फैक्ट्रियां और दूसरे व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी बन गए हैं। कई जगह पांच से सात मंजिल तक की इमारतें डिपो के बेहद करीब खड़ी हैं। इससे न सिर्फ सुरक्षा बल्कि आपात स्थिति में लोगों की सुरक्षा और राहत कार्यों को लेकर भी चिंता बढ़ी है।

इस मामले में अलग-अलग सरकारी सर्वे में अवैध निर्माण की संख्या अलग-अलग बताई गई है। 2017 के MCG सर्वे में 4,156 अवैध ढांचों की पहचान हुई थी, जबकि बाद की रिपोर्टों में 5,000 से अधिक अनधिकृत निर्माण और 190 से ज्यादा चल रहे निर्माण स्थलों का उल्लेख किया गया। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट पहले ही 900 मीटर के क्षेत्र को शहरीकरण से मुक्त रखने की बात कह चुका है। इसके बावजूद निर्माण जारी रहने पर सवाल उठे हैं। हाल की सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने भी अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाते हुए पूछा कि प्रतिबंधित क्षेत्र में इतने बड़े स्तर पर निर्माण कैसे होने दिया गया।

वहीं, इस इलाके में रहने वाले लोगों की अपनी अलग समस्या है। रिपोर्टों के अनुसार, बड़ी संख्या में परिवार लंबे समय से यहां रह रहे हैं और कई घरों में बिजली, पानी, सीवर और दूसरी नागरिक सुविधाएं भी पहुंच चुकी हैं। दूसरी ओर, 900 मीटर की पाबंदी के कारण कई जगहों पर संपत्ति के पंजीकरण, निर्माण और नागरिक विकास कार्य प्रभावित हुए हैं। जून 2026 में गुरुग्राम के विधायक मुकेश शर्मा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात कर मौजूदा स्थिति की समीक्षा और सुरक्षा जरूरतों के अनुसार नए सिरे से नियम तय करने की मांग की थी। ऐसे में गुरुग्राम का यह मामला अब सुरक्षा, अवैध निर्माण और वर्षों से रह रहे लोगों के अधिकारों—तीनों के बीच संतुलन का बड़ा प्रशासनिक और कानूनी मुद्दा बन गया है।