राजपाल यादव के वकील ने SC के दो हफ्ते के अल्टीमेटम पर दी प्रतिक्रिया, बोले- कोर्ट के आदेश का करेंगे पालन

बॉलीवुड अभिनेता राजपाल यादव को चेक बाउंस से जुड़े मामलों में सुप्रीम कोर्ट से दो हफ्ते की आखिरी मोहलत मिलने के बाद उनके वकील भास्कर उपाध्याय ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कोर्ट के आदेश को अपने मुवक्किल के लिए राहत बताया और कहा कि राजपाल यादव की टीम अदालत के निर्देशों का पालन करेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने 15 सितंबर को राजपाल यादव को कम से कम 2 करोड़ रुपये कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने के लिए दो हफ्ते का अंतिम अवसर दिया। कोर्ट ने उनकी पहले की शर्त के तहत आत्मसमर्पण से मिली सुरक्षा को 5 अक्टूबर तक बढ़ाया है। साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट कोर्ट की रजिस्ट्री में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

राजपाल यादव की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस पटवालिया ने अदालत से दो सप्ताह का समय मांगा था। उन्होंने कहा कि अभिनेता इस अवधि में बकाया राशि चुकाने के लिए ठोस प्रस्ताव पेश करेंगे और कम से कम 2 करोड़ रुपये जमा करेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, राजपाल यादव इस रकम की व्यवस्था अपनी मां की कुछ अचल संपत्तियों को बेचकर करने की कोशिश कर रहे हैं।

मामला करीब 15 साल पुराना है और इसकी शुरुआत 2010 में हुई वित्तीय सहायता से हुई थी। शिकायतकर्ता फर्म का आरोप है कि राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए 5 करोड़ रुपये लिए थे और बाद में रकम लौटाने के लिए जारी किए गए चेक बाउंस हो गए। इस विवाद से जुड़े कई मामलों में दिल्ली हाई कोर्ट ने उन्हें तीन महीने की सजा सुनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने राजपाल यादव के पिछले आचरण पर नाराजगी जताई। अदालत ने टिप्पणी की कि उनके पिछले व्यवहार को देखते हुए उन पर भरोसा करना मुश्किल है और अभिनेता की पेशेवर छवि का संदर्भ देते हुए कहा कि वह कोर्ट में भी ‘ड्रामा’ न करें। यह टिप्पणी अदालत की ओर से अनुपालन में हुई देरी को लेकर की गई थी।सुनवाई के बाद उनके वकील भास्कर उपाध्याय ने मीडिया से कहा कि पहले अदालत ने 5 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था, जिसे अब घटाकर 2 करोड़ रुपये कर दिया गया है। उन्होंने इसे अपने मुवक्किल के लिए राहत बताया और कहा कि टीम कोर्ट के आदेश और निर्देशों का पालन करेगी।अब मामले की अगली सुनवाई 5 अक्टूबर को होगी। तब तक राजपाल यादव को 2 करोड़ रुपये जमा करने और बाकी बकाया राशि के भुगतान के लिए ठोस प्रस्ताव पेश करना होगा। अगर अदालत के निर्देशों का पालन नहीं होता है तो उनके लिए आगे की कानूनी स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है।