El Niño का असर: 200 से ज्यादा जिलों में बारिश की कमी, कहीं सूखा तो कहीं भारी बारिश

भारत में इस साल मानसून का मिजाज बेहद असमान नजर आ रहा है। देश के एक तरफ कई इलाकों में भारी बारिश और बाढ़ जैसी स्थिति बनी हुई है, तो दूसरी तरफ 218 जिलों में पिछले चार हफ्तों के दौरान बारिश की कमी के कारण सूखे जैसे हालात सामने आए हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के Standardized Precipitation Index के अनुसार ये जिले मध्यम, गंभीर या अत्यधिक शुष्क श्रेणी में हैं। यह संख्या देश के कुल जिलों के एक-चौथाई से भी ज्यादा है।

इस असमान बारिश के पीछे इस साल सक्रिय El Niño को एक महत्वपूर्ण कारण माना जा रहा है। El Niño के दौरान प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। इससे दुनिया के बड़े हिस्से में हवाओं और वायुमंडलीय दबाव का पैटर्न बदल सकता है और भारतीय मानसून भी प्रभावित हो सकता है। IMD के अनुसार फिलहाल भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में मध्यम El Niño की स्थिति बनी हुई है।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे भारत में बारिश कम ही होगी। El Niño और अन्य स्थानीय मौसम प्रणालियों के प्रभाव से बारिश का वितरण बेहद असमान हो सकता है। इसी वजह से कुछ क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती, जबकि किसी दूसरे इलाके में कम समय में अत्यधिक बारिश हो जाती है। उदाहरण के लिए, सितंबर में बंगाल की खाड़ी में बने कम दबाव के क्षेत्र के कारण कई राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है।

बारिश की कमी का सबसे बड़ा असर खेती और जल संसाधनों पर पड़ सकता है। कम बारिश से मिट्टी में नमी घटती है, सिंचाई की जरूरत बढ़ती है और जलाशयों तथा भूजल पर दबाव बढ़ सकता है। देश में इस साल के मानसून सीजन में संचयी बारिश सामान्य से करीब 15 प्रतिशत कम रहने की रिपोर्ट सामने आई है, जिससे दालों और तिलहन जैसी फसलों को लेकर चिंता बढ़ी है।

दूसरी ओर, जिन क्षेत्रों में कम समय में बहुत ज्यादा बारिश हो रही है, वहां बाढ़, जलभराव, फसल नुकसान और बुनियादी ढांचे को नुकसान जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। यानी इस साल चुनौती सिर्फ बारिश की कमी नहीं, बल्कि बारिश का असमान और अत्यधिक वितरण भी है। यही वजह है कि एक ही समय में देश के कुछ हिस्सों में सूखे जैसे हालात और दूसरे हिस्सों में बाढ़ जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।

आने वाले समय में स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि El Niño कितना प्रभावी रहता है और मानसून की गतिविधियां किस तरह आगे बढ़ती हैं। अगर बारिश का असमान पैटर्न जारी रहता है, तो इसका असर खेती, खाद्य कीमतों, जल उपलब्धता और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। ऐसे में सरकारों के लिए जल प्रबंधन, किसानों के लिए फसल रणनीति और आम लोगों के लिए पानी की बचत बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।