नई दिल्ली में 18वां BRICS शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। भारत की अध्यक्षता में हो रहे इस सम्मेलन में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन समेत BRICS के 11 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष जारी है और BRICS के भीतर भी इस संकट को लेकर अलग-अलग मत सामने आए हैं।
सम्मेलन शुरू होने से कुछ घंटे पहले BRICS देशों के बीच संयुक्त घोषणा पर सहमति बन गई। Reuters के मुताबिक, बातचीत से जुड़े चार सूत्रों ने बताया कि नई दिल्ली घोषणा में किसी एक देश का नाम लिए बिना एकतरफा युद्ध की निंदा की जाएगी। इस सहमति को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि मई में BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच मतभेदों के कारण संयुक्त बयान जारी नहीं हो पाया था।
पश्चिम एशिया का संकट इस सम्मेलन के सबसे संवेदनशील मुद्दों में शामिल है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर BRICS के भीतर भी दिखाई दे रहा है। ईरान और UAE दोनों BRICS के सदस्य हैं, लेकिन मौजूदा युद्ध में दोनों देशों की स्थिति अलग है। UAE पर ईरानी हमलों के बाद अबू धाबी ने अगस्त में ईरान के साथ व्यापार और वित्तीय लेनदेन रोकने का फैसला किया था। ऐसे में दोनों पक्षों को स्वीकार्य भाषा में संयुक्त घोषणा तैयार करना भारत के लिए बड़ी कूटनीतिक चुनौती थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्थिति दोहराते हुए कहा कि सभी मुद्दों का समाधान बातचीत और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। उन्होंने क्षेत्र में स्थायी शांति और स्थिरता, समुद्री मार्गों और व्यापार की स्वतंत्रता तथा नाविकों की सुरक्षा पर भी जोर दिया।
भारत ने इस वर्ष BRICS की अध्यक्षता के लिए “Building for Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability” का विषय रखा है। सम्मेलन में आर्थिक सहयोग के साथ ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, मजबूत सप्लाई चेन, तकनीक, व्यापार, निवेश और वैश्विक संस्थाओं में सुधार जैसे मुद्दों पर चर्चा हो रही है। भारत BRICS को ग्लोबल साउथ के देशों के लिए ज्यादा प्रभावी और व्यावहारिक मंच बनाने पर जोर दे रहा है।
BRICS का विस्तार होने के बाद अब इसमें 11 सदस्य देश हैं। भारत, चीन, रूस, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, UAE और सऊदी अरब भी समूह का हिस्सा हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, ये देश मिलकर दुनिया की करीब 49.5 प्रतिशत आबादी, लगभग 40 प्रतिशत वैश्विक GDP और करीब 26 प्रतिशत वैश्विक व्यापार का प्रतिनिधित्व करते हैं।
सम्मेलन के दौरान व्यापार में स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल, निवेश बढ़ाने, नई तकनीक, ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा तथा वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार जैसे मुद्दे भी महत्वपूर्ण रहेंगे। BRICS लंबे समय से IMF, विश्व बैंक और अन्य वैश्विक संस्थाओं में विकासशील देशों की ज्यादा भूमिका की मांग करता रहा है। अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने और आपसी व्यापार को बढ़ावा देने के विकल्पों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।अब सबकी नजर नई दिल्ली घोषणा के अंतिम स्वरूप और BRICS नेताओं की संयुक्त बैठक के नतीजों पर है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच इस घोषणा को BRICS की एकजुटता की परीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। अगर सभी सदस्य देश साझा भाषा पर कायम रहते हैं, तो भारत की अध्यक्षता में हुए इस सम्मेलन को समूह के भीतर मतभेदों के बावजूद आम सहमति बनाने की एक अहम कूटनीतिक उपलब्धि माना जा सकता है।





