
उद्घाटन से पहले ही उत्तर प्रदेश में ₹4,400 करोड़ की भारी-भरकम लागत से बन रहा महात्वाकांक्षी ‘रामवन गमन मार्ग’ विवादों के घेरे में आ गया है। अयोध्या से चित्रकूट को जोड़ने वाले इस राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा औपचारिक लोकार्पण से पहले ही धंस गया, जिससे निर्माण की गुणवत्ता और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। प्रयागराज के पौराणिक श्रृंगवेरपुर धाम के पास नवनिर्मित सड़क में कई फीट लंबी गहरी दरारें आ गईं और डामर की ऊपरी परत पूरी तरह से जमीन में धंस गई। स्थानीय लोगों और यात्रियों द्वारा जब इस जर्जर स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया गया, तो प्रशासनिक महकमे और कार्यदायी संस्थाओं में हड़कंप मच गया।यह परियोजना केवल एक सड़क निर्माण नहीं है, बल्कि इसका सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व अत्यंत व्यापक है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्री राम ने अपने 14 वर्षों के वनवास के दौरान अयोध्या से चित्रकूट तक जाने के लिए जिस मार्ग का अनुसरण किया था, उसी स्मृति में इस ‘रामवन गमन मार्ग’ का निर्माण किया जा रहा है। सरकार की योजना इस मार्ग को चार-लेन (4-lane) राजमार्ग के रूप में विकसित कर अयोध्या, श्रृंगवेरपुर, कौशांबी और चित्रकूट जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों को आपस में जोड़ने की है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यात्रा सुगम हो सके।हालांकि, मानसून की पहली बारिश और हल्के यातायात के दबाव में ही सड़क का इस तरह क्षतिग्रस्त होना इंजीनियरिंग और घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों और स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत के कारण सड़क की नींव तैयार करते समय मिट्टी के भराव (Embankment) को ठीक से कंपैक्ट नहीं किया गया और घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया। इसके अलावा, क्षेत्र में जलनिकासी (Drainage system) की उचित व्यवस्था न होने के कारण बारिश का पानी सड़क के बेस में घुस गया, जिससे नीचे की मिट्टी खिसक गई और ऊपर की पक्की सड़क धंस गई।घटना के तूल पकड़ने के बाद भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और संबंधित निर्माण एजेंसी ने आनन-फानन में मशीनों और श्रमिकों को तैनात कर प्रभावित हिस्से की मरम्मत और पैचवर्क का काम शुरू करवा दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने घटना की तकनीकी जांच के आदेश दिए हैं, ताकि सड़क धंसने के वास्तविक कारणों का पता लगाया जा सके और जिम्मेदार ठेकेदारों व अभियंताओं पर कार्रवाई की जा सके। उद्घाटन से पहले ही करोड़ों रुपये की लागत से बनी सार्वजनिक संपत्ति का इस तरह बर्बाद होना न केवल बजटीय नुकसान को दर्शाता है, बल्कि आने वाले समय में इस मार्ग पर सफर करने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।





