चित्र में दिखाई दे रहे टोगो (Togo) के विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे (Robert Dussey) द्वारा प्रस्तुत “Correct the Map” (नक्शा सुधारें) अभियान वैश्विक मानचित्रण (Cartography), शिक्षा और अंतरराष्ट्रीय राजनीति की दुनिया में एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है। सितंबर 2026 में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में अफ्रीकी समूह और अफ्रीकी संघ की ओर से पेश किए गए इस ऐतहासिक प्रस्ताव को 164 देशों के भारी बहुमत से पारित किया गया। इस अभियान का मूल उद्देश्य किसी देश, क्षेत्र या सभ्यता को नीचा दिखाना नहीं, बल्कि सदियों पुराने औपनिवेशिक व भौगोलिक भ्रम को दूर कर दुनिया के सामने एक निष्पक्ष, वैज्ञानिक और अनुपातिक रूप से सटीक वैश्विक मानचित्र पेश करना है।

पिछले 450 से भी अधिक वर्षों से दुनिया भर के स्कूलों, शोध संस्थानों, समाचार पत्रों और डिजिटल नेविगेशन प्लेटफॉर्म्स पर 1569 में फ्लेमिश मानचित्रकार गेरार्डस मर्केटर द्वारा तैयार किया गया मर्केटर प्रोजेक्शन (Mercator Projection) इस्तेमाल होता आ रहा है। हालांकि यह नक्शा समुद्री जहाजों की दिशा तय करने (Navigation) के लिए तकनीकी रूप से बेहद सटीक था, लेकिन एक गोल पृथ्वी को समतल कागज पर उतारने के चक्कर में इसने भूमध्य रेखा से दूर स्थित क्षेत्रों (जैसे अमेरिका, यूरोप, रूस और ग्रीनलैंड) का आकार वास्तविकता से कहीं अधिक बड़ा दिखा दिया। इसके विपरीत, भूमध्य रेखा के आसपास स्थित विशाल महाद्वीप—विशेष रूप से अफ्रीका, भारत और दक्षिण अमेरिका—इस नक्शे में बेहद छोटे और सिकुड़े हुए दिखाई देने लगे। उदाहरण के लिए, मर्केटर नक्शे में ग्रीनलैंड और अफ्रीका लगभग एक ही आकार के नजर आते हैं, जबकि वास्तविक भूगोल में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है। वास्तविकता तो यह है कि अफ्रीका के कुल भूभाग में अमेरिका, चीन, भारत, जापान और पूरे यूरोप को एक साथ समाहित किया जा सकता है।
विदेश मंत्री रॉबर्ट डुसे ने संयुक्त राष्ट्र संघ के मंच से स्पष्ट किया कि “नक्शे सिर्फ भूगोल नहीं बताते, वे दुनिया के प्रति हमारी सोच, शिक्षा और सामूहिक धारणा को गढ़ते हैं”। जब आने वाली पीढ़ियां बचपन से ही किताबों में अपनी मातृभूमि या ग्लोबल साउथ (Global South) के देशों को भौगोलिक रूप से छोटा देखती हैं, तो यह अवचेतन मन में उनके राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक महत्व को कम आंकने की प्रवृत्ति पैदा करता है। इसलिए, यह प्रस्ताव किसी औपनिवेशिक नक्शे को पूरी तरह प्रतिबंधित करने के बजाय एक “वैचारिक और स्मृति संबंधी न्याय” (Cognitive Justice & Memorial Reparation) की पहल है, जो ‘इक्वल अर्थ’ (Equal Earth Projection) जैसी आधुनिक ‘इक्वल-एरिया’ प्रणालियों को शिक्षा, मीडिया, डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में बढ़ावा देने का आह्वान करती है।
संयुक्त राष्ट्र में पारित यह गैर-बाध्यकारी संकल्प यह साबित करता है कि 21वीं सदी में विकासशील और अफ्रीकी देश अब अपनी गरिमा, ऐतिहासिक यथार्थ और भौगोलिक पहचान को बिना किसी पूर्वाग्रह के दुनिया के सामने रखने के लिए पूरी तरह एकजुट हैं। यह वैश्विक समानता, निष्पक्षता और वैज्ञानिक सत्यता स्थापित करने की दिशा में एक दूरगामी और ऐतिहासिक कदम है।<FollowUp label=”क्या आप ‘मर्केटर’ और ‘इक्वल अर्थ’ नक्शों का तकनीकी अंतर विस्तार से समझना चाहते हैं?” query=”मर्केटर प्रोजेक्शन और इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन के बीच क्या मुख्य तकनीकी अंतर हैं, और ये आकार को कैसे प्रभावित करते हैं?





