इंडोनेशिया में माउंट अनक क्राकाटोआ के अचानक सक्रिय होने से हवाई यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है। ज्वालामुखी से निकली राख का गुबार 50 हजार फीट तक ऊपर पहुंच गया, जिसके बाद देश के कई हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन रोकना पड़ा। अकेले जकार्ता के सोएकार्नो-हट्टा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 301 उड़ानें प्रभावित हुईं, जिनमें 58 अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शामिल हैं।
अनक क्राकाटोआ जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंडा स्ट्रेट में स्थित है। ज्वालामुखी में शुक्रवार देर रात से गतिविधियां बढ़ रही थीं और रविवार तड़के करीब 3:53 बजे स्थानीय समय पर इसका एक विस्फोट हुआ। अधिकारियों के अनुसार, विस्फोट करीब 30 सेकंड तक चला। इसके बाद ज्वालामुखीय राख पश्चिमी इंडोनेशिया के कई हिस्सों में फैल गई।
राख का असर जकार्ता तक पहुंचने के बाद सोएकार्नो-हट्टा एयरपोर्ट पर उड़ान संचालन कई घंटों के लिए रोक दिया गया। एयरपोर्ट ऑपरेटर के मुताबिक, इससे 301 उड़ानें प्रभावित हुईं। इनमें घरेलू उड़ानों के साथ-साथ सिंगापुर, मलेशिया और अन्य अंतरराष्ट्रीय मार्गों की उड़ानें भी शामिल थीं। सिंगापुर एयरलाइंस और मलेशिया एयरलाइंस ने जकार्ता आने-जाने वाली कुछ उड़ानें रद्द कीं।
इंडोनेशिया की मौसम एजेंसी BMKG के अनुसार, जावा की ओर राख करीब 20 हजार फीट की ऊंचाई तक पहुंची, जबकि सुमात्रा और बैंटन प्रांत के कुछ हिस्सों के ऊपर राख का गुबार लगभग 50 हजार फीट यानी 15 किलोमीटर तक दर्ज किया गया। इतनी ऊंचाई पर ज्वालामुखीय राख का पहुंचना विमानन के लिए गंभीर खतरा माना जाता है, क्योंकि राख विमान के इंजन और दृश्यता को प्रभावित कर सकती है।
ज्वालामुखी की राख का असर केवल हवाई यातायात तक सीमित नहीं रहा। पश्चिमी इंडोनेशिया के कुछ इलाकों में स्कूलों की गतिविधियां और मछली पकड़ने की यात्राएं भी रोक दी गईं। स्थानीय लोगों ने आंखों में जलन की शिकायत की। अधिकारियों ने प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को सावधानी बरतने और राख के संपर्क से बचने की सलाह दी है।
अधिकारियों ने फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं दी है। इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने यह भी कहा है कि फिलहाल ज्वालामुखी के कारण सुनामी का तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि, लोगों और पर्यटकों को सक्रिय क्रेटर से कम से कम 3 किलोमीटर दूर रहने की सलाह दी गई है।
अनक क्राकाटोआ का इतिहास भी बेहद खतरनाक रहा है। यह 1883 के विनाशकारी क्राकाटोआ विस्फोट के बाद समुद्र में उभरा था। वर्ष 2018 में अनक क्राकाटोआ के एक बड़े विस्फोट के बाद भूस्खलन से सुनामी आई थी, जिसमें 400 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसी वजह से मौजूदा गतिविधि पर इंडोनेशियाई अधिकारी लगातार नजर बनाए हुए हैं।
फिलहाल सबसे बड़ी चिंता राख के फैलाव और उसके कारण हवाई यातायात पर पड़ने वाले असर को लेकर है। अधिकारियों ने स्थिति पर निगरानी बढ़ा दी है और यात्रियों को अपनी उड़ान की स्थिति की पुष्टि करने के बाद ही एयरपोर्ट पहुंचने की सलाह दी जा रही है।





