उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में अपने मंत्रियों और परिवार के साथ बहुचर्चित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी और इसे पूरे राज्य में टैक्स-फ्री (कर मुक्त) घोषित कर दिया।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हाल ही में अपने परिवार और राज्य सरकार के मंत्रियों के साथ बहुचर्चित फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी और इसके तुरंत बाद इसे पूरे राज्य में टैक्स-फ्री (कर मुक्त) घोषित कर दिया। फिल्म देखने के बाद सीएम धामी ने न केवल इसके निर्देशन और अभिनय की सराहना की, बल्कि यह भी कहा कि यह फिल्म देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक धरोहर को एक नया आयाम देती है। सरकार के इस फैसले से अब आम नागरिक और श्रद्धालु कम दरों पर टिकट खरीदकर इस प्रेरणादायक सिनेमा का आनंद ले सकेंगे।विशाल चतुर्वेदी द्वारा लिखित और निर्देशित फिल्म ‘हनुमान अंश’ 20वीं सदी के महान संत बाबा नीम करौली जी के जीवन और उनकी आध्यात्मिक चेतना पर आधारित है। यह कहानी एक साधारण युवक ‘लक्ष्मी नारायण’ के जीवन से शुरू होती है, जो अपनी माता के निधन के बाद जीवन, मृत्यु और इंसानी दुखों के उत्तर तलाशने के लिए एक कठिन यात्रा पर निकलता है। उत्तर भारत में अपनी आत्म-खोज की इस यात्रा के दौरान, कैसे एक साधारण युवा दिव्य चेतना प्राप्त कर ‘बाबा नीम करौली’ के रूप में प्रतिष्ठित होता है, इसे बड़े ही मर्मस्पर्शी और भावनात्मक ढंग से परदे पर उतारा गया है।फिल्म का मुख्य उद्देश्य दर्शकों को यह समझाना है कि सच्चा धर्म और भक्ति केवल बाहरी आडंबरों या कर्मकांडों में सीमित नहीं है, बल्कि मानव सेवा, समर्पण और निःस्वार्थ प्रेम में निहित है। अभिनेता शोभिनव सत्य ने बाबा नीम करौली जी की मुख्य भूमिका को बेहद जीवंतता के साथ निभाया है, जबकि विहान शेडगे, चंदन के. आनंद, पूर्णिमा तिवारी और अनिल रस्तोगी जैसे कलाकारों ने अपने सहज अभिनय से कहानी को और प्रभावशाली बना दिया है। यही कारण है कि फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों दोनों से ही सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है।नैनीताल जिले में स्थित कैंची धाम आज पूरे विश्व में लाखों श्रद्धालुओं और प्रसिद्ध हस्तियों के लिए आस्था का एक प्रमुख केंद्र बन चुका है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा फिल्म को कर मुक्त करने का यह निर्णय केवल मनोरंजन को बढ़ावा देना नहीं है, बल्कि उत्तराखंड में आध्यात्मिक पर्यटन (Spiritual Tourism) को नई ऊर्जा देना भी है। मुख्यमंत्री धामी के इस कदम की चौतरफा सराहना हो रही है, क्योंकि यह फिल्म न केवल युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ेगी, बल्कि बाबा नीम करौली जी की शिक्षाओं को दुनिया भर में फैलाएगी।