CJP प्रदर्शनकारी के पिता पर हमले के मामले में स्वतंत्र भारद्वाज को 1 दिन की न्यायिक हिरासत, FIR में SC/ST एक्ट और धमकी की धाराएं भी जुड़ीं

दिल्ली की एक अदालत ने सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज को CJP प्रदर्शनकारी के पिता संजय कुमार पर कथित हमले के मामले में एक दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। रविवार को उन्हें ड्यूटी मजिस्ट्रेट अंजलि सिंह के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया, जिसके बाद अदालत ने यह आदेश दिया। इससे एक दिन पहले उन्हें एक दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया था।यह मामला जून में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Cockroach Janta Party (CJP) के प्रदर्शन से जुड़ा है। आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान स्वतंत्र भारद्वाज और कुछ अन्य लोगों ने छात्र कार्यकर्ता निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ मारपीट की। पुलिस के मुताबिक, शुरुआती FIR में मारपीट और गलत तरीके से रोकने से संबंधित धाराएं लगाई गई थीं।

मामले ने उस समय नया मोड़ लिया जब भारद्वाज का एक पॉडकास्ट इंटरव्यू सामने आया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसमें उन्होंने दावा किया कि उन्होंने प्रदर्शन के दौरान संजय कुमार की खोपड़ी पर चोट की थी और राजनीतिक संपर्कों की वजह से उन्हें गिरफ्तार नहीं किया गया। हालांकि, पुलिस ने पहले कहा था कि संजय की चोटें ‘सिंपल’ प्रकृति की थीं और मेडिकल रिपोर्ट में गंभीर खोपड़ी फ्रैक्चर की पुष्टि नहीं हुई थी। भारद्वाज ने बाद में दावा किया कि उन्होंने आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी।

वीडियो सामने आने के बाद CJP समर्थकों ने कार्रवाई की मांग तेज कर दी। शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली के पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया और बाद में उन्हें गिरफ्तार कर दिल्ली लाया गया।पुलिस ने FIR में SC/ST (Prevention of Atrocities) Act और आपराधिक धमकी से जुड़ी धाराएं भी जोड़ी हैं। इसके अलावा, नाबालिग CJP कार्यकर्ता की शिकायत पर ऑनलाइन धमकी और उत्पीड़न के आरोपों को लेकर POCSO Act के तहत अलग मामला दर्ज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस इन आरोपों की जांच कर रही है।मामले में राजनीतिक विवाद भी बढ़ गया है। भारद्वाज ने अपने बयानों में कुछ राजनीतिक नेताओं से करीबी होने का दावा किया था। केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हालांकि उनसे दूरी बनाते हुए कहा कि उनके नाम का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया है और उन्होंने इस संबंध में दिल्ली पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई।

दिल्ली पुलिस ने इससे पहले मामले में राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और राजनीतिक दबाव की बात तथ्यात्मक रूप से गलत है। पुलिस ने यह भी कहा था कि मेडिकल रिकॉर्ड में संजय कुमार की चोटों को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ गंभीर दावों की पुष्टि नहीं हुई थी।अब स्वतंत्र भारद्वाज की एक दिन की न्यायिक हिरासत के बाद मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। पुलिस की जांच में यह तय किया जाना बाकी है कि जंतर-मंतर की घटना में वास्तव में क्या हुआ, आरोपों में शामिल लोगों की भूमिका क्या थी और बाद में सामने आए धमकी संबंधी आरोपों के पीछे कौन-कौन लोग हैं। फिलहाल अदालत में लगाए गए आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।