
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान—”जिन्होंने सनातन की आस्था को मिटाने का दुस्साहस किया, वो खुद मिट्टी में मिल गए”—मथुरा में श्री कृष्ण जन्मभूमि परिसर से दिया गया एक प्रमुख राजनीतिक और सांस्कृतिक वक्तव्य है। जन्माष्टमी के अवसर पर आयोजित जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने पौराणिक काल के कंस और रावण से लेकर मुग़ल काल के बाबर जैसे आक्रांताओं का उल्लेख किया। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि जिन अत्याचारियों ने भारत की धार्मिक आस्था को चोट पहुँचाने और सनातन परंपरा को मिटाने का प्रयास किया, वे सत्ताएँ काल के चक्र में स्वयं नष्ट हो गईं और इतिहास के पन्नों में गुमनामी के अंधेरे में लीन हो गईं, जबकि सनातन संस्कृति आज भी पूरी भव्यता के साथ अक्षुण्ण बनी हुई है।
यह संबोधन केवल एक धार्मिक मंच का भाषण नहीं था, बल्कि इसके स्पष्ट वैचारिक और प्रशासनिक निहितार्थ भी हैं। इसके ज़रिए उन्होंने अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण और काशी-ब्रज के विकास को सांस्कृतिक पुनर्जागरण के रूप में प्रस्तुत किया, साथ ही सनातन धर्म पर टिप्पणी करने वाले वैचारिक विरोधियों पर तीखा प्रहार किया। “मिट्टी में मिला देने” का यह विचार न केवल प्राचीन इतिहास में अधर्म के पतन को रेखांकित करता है, बल्कि उत्तर प्रदेश में अपराध और माफिया तत्वों के खिलाफ अपनाई गई राज्य सरकार की ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ नीति का भी स्पष्ट संदेश देता है।





