केन्या के राष्ट्रपति विलियम रूटो ने भारतीय कंपनी Tata Chemicals को देश में अपना संचालन बंद करने का आदेश दिया है। रूटो ने कंपनी पर आरोप लगाया कि Lake Magadi से प्राकृतिक संसाधन निकालने के बावजूद उसने स्थानीय स्तर पर पर्याप्त निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास नहीं किया। राष्ट्रपति ने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या हम दूसरों के गुलाम हैं?
”यह विवाद दक्षिणी केन्या के Kajiado County में Lake Magadi के आसपास Tata Chemicals Magadi के संचालन से जुड़ा है। यहां से मुख्य रूप से soda ash का उत्पादन किया जाता है, जिसका इस्तेमाल कांच और कई औद्योगिक उत्पादों के निर्माण में होता है। इस क्षेत्र में soda ash का उत्पादन 1911 से हो रहा है, यानी करीब 115 वर्षों से यह कारोबार वहां मौजूद है। हालांकि, Tata Chemicals ने इस ऑपरेशन को 2005 में Brunner Mond से खरीदा था, इसलिए कंपनी का खुद का स्वामित्व करीब 21 वर्षों का है।

राष्ट्रपति रूटो ने आरोप लगाया कि कंपनी लंबे समय से केन्या के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल कर रही है, लेकिन संसाधनों की प्रोसेसिंग और उनसे पैदा होने वाला ज्यादा आर्थिक मूल्य देश के भीतर नहीं बन रहा। उनका कहना है कि soda ash को बाहर भेजने के बजाय केन्या में ही कांच और केमिकल उद्योग विकसित किए जाने चाहिए, ताकि स्थानीय लोगों को रोजगार मिले और देश को अधिक आर्थिक फायदा हो।
रूटो ने कहा कि Tata के पास करीब 100 साल पुराना कॉन्ट्रैक्ट था, लेकिन Kajiado में अपेक्षित औद्योगिक विकास नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार अब नए निवेशकों को लाएगी और उनसे स्थानीय स्तर पर manufacturing facilities स्थापित करने की शर्त रखी जाएगी। सरकार की योजना के मुताबिक, एक कंपनी कांच निर्माण और दूसरी रासायनिक उत्पादन से जुड़ी गतिविधियां विकसित कर सकती है।
दरअसल, Tata Chemicals के खिलाफ कार्रवाई अचानक नहीं हुई है। जुलाई 2026 के आखिर में केन्या सरकार ने Tata Chemicals की स्थानीय इकाई को Magadi Soda फैक्ट्री में संचालन रोकने और soda ash के निर्यात को निलंबित करने का आदेश दिया था। कंपनी ने बाद में कहा था कि उसने सरकार द्वारा मांगे गए दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध करा दी है तथा वह नियामकीय प्रक्रिया के जरिए विवाद का समाधान चाहती है।
Tata Chemicals ने रूटो के ताजा बयान के बाद कहा है कि वह केन्या सरकार के अधिकार और निर्णय का सम्मान करती है। कंपनी ने यह भी कहा कि वह लंबित मामलों को उचित कानूनी और नियामकीय माध्यमों से सुलझाने के लिए रचनात्मक बातचीत जारी रखने को प्रतिबद्ध है। यानी फिलहाल कंपनी और केन्या सरकार के बीच विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और आगे कानूनी या नियामकीय प्रक्रिया की संभावना बनी हुई है।
इस फैसले का Tata Chemicals पर कारोबारी असर भी पड़ सकता है। कंपनी केन्या में जिस Magadi कारोबार को संचालित करती है, वह soda ash के वैश्विक कारोबार का हिस्सा है। खबर सामने आने के बाद Tata Chemicals के शेयरों पर भी दबाव देखा गया। कंपनी ने जून 2026 तिमाही में ₹17 करोड़ का consolidated net loss दर्ज किया था, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में ₹252 करोड़ का मुनाफा हुआ था।
हालांकि, केन्या सरकार के फैसले को लेकर वहां राजनीतिक विवाद भी शुरू हो गया है। कुछ विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया है कि Tata Chemicals को हटाने के पीछे केवल स्थानीय विकास का मुद्दा नहीं, बल्कि Magadi क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों को लेकर अन्य कारोबारी हित भी हो सकते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इन्हें फिलहाल राजनीतिक दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा संदेश यह है कि अफ्रीकी देशों में प्राकृतिक संसाधनों के दोहन से जुड़े पुराने विदेशी निवेश समझौतों की समीक्षा तेज हो रही है। केन्या अब संसाधनों से सिर्फ रॉयल्टी या निर्यात आय हासिल करने के बजाय देश के भीतर processing, manufacturing और रोजगार बढ़ाने पर जोर दे रहा है। Tata Chemicals और केन्या सरकार के बीच यह विवाद आने वाले समय में विदेशी कंपनियों और अफ्रीकी देशों के बीच संसाधन समझौतों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।





