मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला परिसर से लगभग 1.3 किलोमीटर दूर जमीन आवंटित किए जाने को लेकर नया विवाद सामने आया है। इस मामले में दायर याचिका पर अदालत 29 जुलाई को सुनवाई करेगी। विवादित भूमि के आवंटन को लेकर दोनों पक्षों ने अपने-अपने तर्क रखे हैं और अदालत के फैसले पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि भोजशाला जैसे ऐतिहासिक और संवेदनशील धार्मिक स्थल के आसपास किसी भी प्रकार के भूमि आवंटन या निर्माण से पहले सभी कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और सभी पक्षों की सहमति आवश्यक है।
दूसरी ओर, संबंधित पक्ष का कहना है कि आवंटित भूमि भोजशाला परिसर से पर्याप्त दूरी पर स्थित है और यह निर्णय नियमानुसार लिया गया है। उनका दावा है कि इस आवंटन से स्मारक या उसके धार्मिक स्वरूप पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का विषय रही है।
इस स्थल को लेकर पहले भी कई बार अदालत में सुनवाई हो चुकी है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट तथा अन्य दस्तावेजों पर भी न्यायालय में चर्चा हुई है।
अब 29 जुलाई को होने वाली सुनवाई में अदालत दोनों पक्षों की दलीलें सुनेगी। माना जा रहा है कि इस मामले में अदालत के निर्देश आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया और भूमि आवंटन से जुड़े विवाद की दिशा तय कर सकते हैं। इस कारण स्थानीय लोगों, दोनों पक्षों और प्रशासन की नजरें इस सुनवाई पर बनी हुई हैं।





