सिक्किम टनल हादसा: सुरंग में विस्फोट और भूस्खलन से 25 लोगों की मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन समाप्त

सिक्किम के नामची जिले में निर्माणाधीन तीस्ता स्टेज-6 जलविद्युत परियोजना की सुरंग में हुए भीषण हादसे ने पूरे देश को झकझोर दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, सुरंग के भीतर मीथेन गैस के विस्फोट के बाद भूस्खलन हुआ, जिससे कई मजदूर और परियोजना से जुड़े कर्मचारी मलबे के नीचे दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, सेना, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य बचाव एजेंसियां मौके पर पहुंचीं और युद्धस्तर पर राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया।

कई दिनों तक लगातार चले रेस्क्यू अभियान के बाद सुरंग में फंसे सभी 25 लोगों के शव बरामद कर लिए गए हैं। अधिकारियों ने पुष्टि की है कि बचाव अभियान अब समाप्त कर दिया गया है। बचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर जहरीली गैसों की मौजूदगी, भारी मलबा और सीमित जगह रही। बचावकर्मियों को विशेष सुरक्षा उपकरणों के साथ अंदर भेजा गया और अत्यंत कठिन परिस्थितियों में अभियान को अंजाम दिया गया।

प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि सुरंग के भीतर मीथेन गैस का दबाव बढ़ने के कारण विस्फोट हुआ, जिसके बाद सुरंग का एक हिस्सा ढह गया और बड़ी मात्रा में मलबा गिरने से मजदूर बाहर नहीं निकल सके। हालांकि हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगाने के लिए राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच समिति यह पता लगाएगी कि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन किया गया था या नहीं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन सुधारों की आवश्यकता है।

इस हादसे के बाद निर्माण परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सुरंग निर्माण जैसे जोखिमपूर्ण कार्यों में गैस मॉनिटरिंग सिस्टम, पर्याप्त वेंटिलेशन, आपातकालीन निकासी मार्ग और नियमित सुरक्षा ऑडिट अनिवार्य होने चाहिए। यदि सुरक्षा में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।

हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिवारों में गहरा शोक व्याप्त है। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता और मुआवजा देने का आश्वासन दिया है। यह दुर्घटना देश की प्रमुख औद्योगिक त्रासदियों में से एक मानी जा रही है और इसने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में श्रमिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता कैसे दी जाए।