2030 तक 110 अरब डॉलर होगी चिप की खपत, नोएडा में बढ़ेगा सेमीकंडक्टर निवेश

भारत में सेमीकंडक्टर यानी चिप की मांग तेजी से बढ़ रही है। अनुमान है कि 2030 तक देश में सेमीकंडक्टर की खपत करीब 110 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है। मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, 5G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, ऑटोमोबाइल और डिफेंस जैसे क्षेत्रों में चिप की बढ़ती जरूरत इसकी बड़ी वजह है। ऐसे में भारत अब चिप की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ-साथ देश में ही इसके निर्माण को बढ़ावा देने पर जोर दे रहा है।

इस बदलाव में नोएडा और आसपास का क्षेत्र अहम भूमिका निभा सकता है। उत्तर प्रदेश सरकार सेमीकंडक्टर कंपनियों को आकर्षित करने के लिए विशेष नीतियों और प्रोत्साहनों के जरिए निवेश का माहौल तैयार कर रही है। उत्तर प्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति के तहत पात्र परियोजनाओं के लिए जमीन पर 75 प्रतिशत तक की छूट का प्रावधान है। इसके अलावा बिजली, पानी, प्रशिक्षण, रिसर्च और पेटेंट जैसी सुविधाओं को भी बढ़ावा देने की योजना है।

नोएडा में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर से जुड़ा इकोसिस्टम पहले से विकसित हो रहा है। HCL-Foxconn का सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट भी इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इस परियोजना में करीब 3,706 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। परियोजना से बड़े पैमाने पर चिप निर्माण और पैकेजिंग से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार का असर सिर्फ चिप निर्माण तक सीमित नहीं रहेगा। इससे चिप डिजाइन, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट, पैकेजिंग, मशीनरी, रिसर्च और टेक्निकल स्किल से जुड़े क्षेत्रों में भी नए अवसर पैदा हो सकते हैं। इससे नोएडा और आसपास के इलाकों में औद्योगिक गतिविधियां बढ़ने के साथ रोजगार के नए अवसर भी बन सकते हैं।

केंद्र सरकार भी भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग और डिजाइन हब बनाने की दिशा में काम कर रही है। बढ़ती घरेलू खपत और लगातार हो रहे निवेश के बीच नोएडा देश के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर सकता है। आने वाले वर्षों में यहां चिप निर्माण से जुड़ी कंपनियों और सप्लाई चेन के विस्तार से उत्तर प्रदेश की इलेक्ट्रॉनिक्स इंडस्ट्री को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।