तिरुवनंतपुरम की एक फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने 15 वर्षीय किशोर के यौन उत्पीड़न के मामले में 43 वर्षीय व्यक्ति को कुल 47 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने दोषी पर 32 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना नहीं भरने की स्थिति में उसे अतिरिक्त तीन साल और तीन महीने जेल में रहना होगा। यह फैसला जज अंजू मीरा बिरला की अदालत ने सुनाया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना 24 मई 2025 की है। आरोपी पीड़ित किशोर का पड़ोसी और रिश्तेदार भी था। उसने कथित तौर पर किशोर को अपने घर मुर्गियों को खिलाने के लिए चावल लाने के बहाने बुलाया। जब किशोर चावल लेकर उसके घर पहुंचा, तब घर में कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था। आरोप है कि आरोपी उसे घर के अंदर ले गया और उसका यौन उत्पीड़न किया।
मामले के अनुसार, घटना के दौरान जब एक अन्य व्यक्ति घर पहुंचा तो आरोपी ने कथित तौर पर किशोर को एक कमरे में बंद कर दिया और खुद बाहर आ गया। बाद में जब किशोर के दादा उसे तलाशते हुए वहां पहुंचे, तो आरोपी ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि किशोर वहां से जा चुका है और उन्हें वापस भेज दिया। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर किशोर के साथ फिर से यौन उत्पीड़न किया।
अभियोजन के मुताबिक, घटना के बाद किशोर डर के कारण तुरंत अपने परिवार को कुछ नहीं बता सका। बाद में जब परिवार ने उसे आरोपी के घर कुछ सामान देने के लिए कहा तो उसने वहां जाने से इनकार कर दिया। परिवार के पूछने पर उसने अपनी बहन को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद परिवार ने वलियाथुरा पुलिस से संपर्क किया।
अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को दोषी ठहराते हुए 47 साल के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक आरएस विजय मोहन और सुरभि पी ने पैरवी की।





