हरियाणा में हत्या के एक आरोपी को जमानत मिलने के बाद कथित तौर पर ‘विजय जुलूस’ निकालना भारी पड़ गया। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए हरियाणा पुलिस को आरोपी विशाल को गिरफ्तार कर अदालत के सामने पेश करने का निर्देश दिया है। शीर्ष अदालत ने साफ कहा कि जमानत मिलने के बाद इस तरह विजय जुलूस निकालना उचित नहीं है। आरोपी पर गवाहों को धमकाने के भी आरोप लगाए गए हैं।
यह मामला चरखी दादरी जिले से जुड़ा है। शिकायतकर्ता पक्ष के अनुसार, 27 अक्टूबर 2022 को जमीन के एक विवादित टुकड़े पर टिन शेड बनाने को लेकर आरोपी विशाल और शिकायतकर्ता राजबाला के परिवार के बीच विवाद हुआ था। आरोप है कि कहासुनी के दौरान विशाल ने लाठी और कुल्हाड़ी से कई लोगों पर हमला किया, जिसमें शिकायतकर्ता पक्ष का एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हुआ और बाद में उसकी मौत हो गई।
मामले में विशाल को गिरफ्तार किया गया था और वह तीन साल से अधिक समय तक हिरासत में रहा। पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने उसकी जमानत याचिका पहले चार बार खारिज की थी, लेकिन 23 अप्रैल को पांचवीं कोशिश में उसे जमानत दे दी गई। अदालत के सामने यह भी रखा गया था कि मामले के महत्वपूर्ण गवाहों की गवाही पूरी हो चुकी है और आरोपी लंबे समय से जेल में है।
इसके बाद आरोपी पर जमानत मिलने की खुशी में सार्वजनिक तौर पर ‘विजय जुलूस’ निकालने और कथित तौर पर गवाहों को धमकाने के आरोप लगे। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने इस पर कड़ी नाराजगी जताई। अदालत ने आरोपी से कहा कि पहले वह सरेंडर करे और उसके बाद जमानत के लिए अदालत का रुख करे। सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की कि जमानत पर बाहर आने के बाद विजय जुलूस निकालना सही नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपी के खिलाफ अगस्त में गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका था, लेकिन पुलिस उसे अब तक गिरफ्तार कर अदालत में पेश नहीं कर सकी थी। शीर्ष अदालत ने चरखी दादरी के पुलिस अधीक्षक को निर्देश दिया कि गैर-जमानती वारंट पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और आरोपी को अगली सुनवाई में अदालत के सामने पेश किया जाए। अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को तय की गई है।
अदालत ने रजिस्ट्री को आदेश की प्रति 24 घंटे के भीतर पुलिस अधीक्षक तक ईमेल और अन्य माध्यमों से पहुंचाने का भी निर्देश दिया। अब हरियाणा पुलिस के सामने आरोपी को अदालत में पेश करने के साथ-साथ उसके खिलाफ जारी गैर-जमानती वारंट को लागू करने की जिम्मेदारी है। फिलहाल हत्या और गवाहों को धमकाने से जुड़े आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और मामले में अंतिम दोष सिद्ध होना बाकी है।





