गुजरात के सूरत शहर में हुई मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया। शहर के कतारगाम क्षेत्र स्थित किरण हॉस्पिटल के पास का दृश्य किसी बाढ़ग्रस्त इलाके से कम नहीं था। लगातार हुई तेज बारिश के कारण सड़कों पर करीब तीन फीट ऊंचाई तक पानी बहने लगा, जिससे पूरा इलाका जलमग्न हो गया। सड़कें नदी में तब्दील हो गईं और लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।
भारी जलभराव के कारण दोपहिया और चारपहिया वाहन बीच सड़क में ही फंस गए। कई मोटरसाइकिलें पूरी तरह पानी में डूब गईं, जबकि कई कारों का आधे से अधिक हिस्सा पानी में समा गया। तेज बहाव के कारण कुछ वाहन बहते हुए भी दिखाई दिए। कई वाहन चालकों ने किसी तरह अपनी जान बचाकर गाड़ियों को छोड़ना ही बेहतर समझा।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पानी इंजन तक पहुंच जाने से बड़ी संख्या में कारों और मोटरसाइकिलों के इंजन खराब हो गए। इससे वाहन मालिकों को लाखों रुपये के नुकसान की आशंका है। कई लोग घंटों तक सड़क पर फंसे रहे और यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। जलभराव के कारण एंबुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को भी प्रभावित होने की आशंका जताई गई, क्योंकि अस्पताल के आसपास का पूरा क्षेत्र पानी से घिर गया था।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि बारिश शुरू होने के कुछ ही समय बाद जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह जवाब दे गई। नालियां ओवरफ्लो हो गईं और पानी सड़कों पर तेजी से भरने लगा। देखते ही देखते हालात इतने बिगड़ गए कि पैदल चलना भी मुश्किल हो गया। कई दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में भी पानी घुस गया, जिससे व्यापारियों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
बारिश के बाद नगर निगम की जल निकासी व्यवस्था पर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर साल मानसून से पहले तैयारियों के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन पहली ही भारी बारिश में शहर की सड़कें पानी में डूब जाती हैं। लोगों का आरोप है कि यदि नालों की समय पर सफाई और ड्रेनेज सिस्टम का उचित रखरखाव किया गया होता, तो इतनी गंभीर स्थिति पैदा नहीं होती।
प्रशासन की टीमें प्रभावित इलाकों में जल निकासी का कार्य कर रही हैं और लोगों से अनावश्यक रूप से घरों से बाहर न निकलने की अपील की गई है। मौसम विभाग ने भी आगामी घंटों में और बारिश की संभावना जताई है, जिसके चलते प्रशासन अलर्ट मोड पर है।
सूरत में हुई इस भारी बारिश ने एक बार फिर शहरी जल निकासी व्यवस्था की पोल खोल दी है। अस्पताल जैसे संवेदनशील क्षेत्र के आसपास जलभराव ने न केवल आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दीं, बल्कि आपातकालीन सेवाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब लोगों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई और स्थायी समाधान पर टिकी हुई है।




