टीम इंडिया के पूर्व स्टार बल्लेबाज सुरेश रैना ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर के आखिरी दौर और महज 33 साल की उम्र में संन्यास लेने के फैसले पर खुलकर बात की है। रैना ने बताया कि भारतीय टीम से बाहर होने के बाद उन्होंने तत्कालीन कप्तान विराट कोहली और टीम मैनेजमेंट से कई बार यह जानने की कोशिश की कि उन्हें आखिर टीम में क्यों नहीं चुना जा रहा, लेकिन उन्हें वह स्पष्टता नहीं मिली जिसकी उन्हें उम्मीद थी। रैना ने यह भी खुलासा किया कि 15 अगस्त 2020 को जब उन्होंने संन्यास का फैसला एमएस धोनी को बताया, तो धोनी भी हैरान रह गए थे।
पूर्व भारतीय ओपनर आकाश चोपड़ा के शो ‘Baith & Bol’ में बातचीत करते हुए रैना ने अपने करियर के उस दौर को याद किया, जब वह टीम इंडिया में वापसी की कोशिश कर रहे थे। उनके मुताबिक, उन्होंने अपनी फिटनेस पर काम किया, घरेलू क्रिकेट खेला और प्रदर्शन के जरिए राष्ट्रीय टीम में लौटने का प्रयास किया। रैना ने कहा कि वह और युवराज सिंह दोनों फिटनेस हासिल करने और रन बनाने के बावजूद टीम की योजनाओं से बाहर होते चले गए।
रैना के लिए सबसे बड़ा झटका 2019 वनडे वर्ल्ड कप की टीम में जगह नहीं मिलना था। उनका आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच जुलाई 2018 में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे था। इसके बाद वह भारतीय टीम में वापसी नहीं कर सके। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्होंने कप्तान और कोचिंग स्टाफ से अपनी स्थिति को लेकर सवाल किए, लेकिन उन्हें भविष्य की भूमिका को लेकर स्पष्ट जवाब नहीं मिला।
रैना ने आखिरकार 15 अगस्त 2020 को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। खास बात यह थी कि उसी दिन कुछ मिनट पहले एमएस धोनी ने भी अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा था। इसके चलते लंबे समय तक यह धारणा बनी रही कि रैना ने अपने करीबी दोस्त और कप्तान धोनी के साथ ही संन्यास लेने का फैसला किया था। लेकिन अब रैना ने बताया है कि धोनी को भी पहले से उनके फैसले की जानकारी नहीं थी।
रैना के मुताबिक, धोनी के रिटायरमेंट के बाद वह ड्रेसिंग रूम में गए और उन्हें बताया कि उन्होंने भी संन्यास लेने का फैसला कर लिया है। इस पर धोनी ने हैरानी से उनसे कहा, “ये क्या किया तूने?” रैना ने कहा कि उस समय उन्हें लगा था कि यही संन्यास लेने का सही वक्त है। वह अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना चाहते थे और पिछले कुछ वर्षों में टीम इंडिया में उनकी स्थिति भी अनिश्चित बनी हुई थी।
हालांकि, रैना ने साफ किया कि उन्हें अपने फैसले पर आज भी कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने कहा कि एक साधारण परिवार से निकलकर राज्य और फिर देश का प्रतिनिधित्व करना उनके लिए बहुत बड़ी उपलब्धि थी। उनके पिता सेना में थे और परिवार सीमित संसाधनों में रहता था। क्रिकेट ने उनकी जिंदगी बदल दी और इसी वजह से वह पीछे मुड़कर अपने करियर को निराशा के साथ नहीं देखते।
रैना ने धोनी के साथ अपने रिश्ते को लेकर भी दिलचस्प खुलासा किया। उन्होंने कहा कि धोनी ने कप्तान रहते हुए कई बार अपनी बल्लेबाजी की पोजिशन का त्याग किया, ताकि युवराज सिंह और रैना जैसे खिलाड़ियों को ऊपर बल्लेबाजी करने का मौका मिल सके। रैना के मुताबिक, जब कोई कप्तान आपकी क्षमता पर इतना भरोसा दिखाता है तो खिलाड़ी के अंदर भी उसके लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देने की भावना पैदा होती है। यही वजह थी कि धोनी और रैना की दोस्ती मैदान के बाहर भी बेहद मजबूत बनी।
सुरेश रैना ने भारत के लिए 18 टेस्ट, 226 वनडे और 78 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। वह 2011 वनडे विश्व कप जीतने वाली भारतीय टीम का भी अहम हिस्सा थे और तीनों अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों में शतक लगाने वाले शुरुआती भारतीय बल्लेबाजों में शामिल रहे। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट छोड़ने के बाद उन्होंने IPL खेलना जारी रखा और 2021 में चेन्नई सुपर किंग्स की खिताबी जीत का हिस्सा बने। सितंबर 2022 में उन्होंने भारतीय घरेलू क्रिकेट और IPL से भी संन्यास की घोषणा कर दी।
छह साल बाद अपने रिटायरमेंट पर विस्तार से बात करते हुए रैना ने साफ कर दिया है कि यह फैसला सिर्फ धोनी के पीछे-पीछे संन्यास लेने का नहीं था। टीम इंडिया में वापसी को लेकर अनिश्चितता, 2019 वर्ल्ड कप में नहीं चुना जाना, परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा और करियर के उस दौर की परिस्थितियों ने उनके फैसले में भूमिका निभाई। इसके बावजूद रैना का कहना है कि उन्हें अपने क्रिकेट सफर या संन्यास के फैसले को लेकर कोई पछतावा नहीं है।





