वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति और न्यायपालिका में महिला प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूर्व मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि इस दौरान सुप्रीम कोर्ट में 17 जज नियुक्त किए गए, लेकिन इनमें एक भी महिला नहीं थी।
दवे ने कहा कि न्यायपालिका में समाज के अलग-अलग वर्गों और महिलाओं का पर्याप्त प्रतिनिधित्व होना जरूरी है। उनके मुताबिक, अगर न्यायपालिका में विविधता नहीं होगी तो समाज के अलग-अलग हिस्सों की समस्याओं और परिस्थितियों को समझने में कमी रह सकती है।
उन्होंने न्यायपालिका में कथित भ्रष्टाचार को लेकर भी गंभीर चिंता जताई। दवे ने अपने लंबे कानूनी अनुभव का हवाला देते हुए कहा कि उन्होंने ऐसे जज भी देखे हैं जिनके आचरण से न्याय व्यवस्था को नुकसान पहुंचा। उन्होंने न्यायपालिका में जवाबदेही और पारदर्शिता मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया।
दवे ने यह भी कहा कि अदालतों को संविधान और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा में अपनी भूमिका मजबूती से निभानी चाहिए। उनकी इन टिप्पणियों के बाद सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति, महिला प्रतिनिधित्व, सामाजिक विविधता और न्यायपालिका की जवाबदेही को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है।





