भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन को साफ शब्दों में कहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता के बिना दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाना मुश्किल है। भारत और चीन के बीच बेहतर संबंधों के लिए सीमा पर तनाव कम करना और आपसी भरोसा बनाए रखना जरूरी है। भारत का मानना है कि दोनों देशों के संबंध तभी आगे बढ़ सकते हैं, जब सीमा से जुड़े मुद्दों पर गंभीरता से काम किया जाए।
भारत और चीन के रिश्तों में जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव बढ़ गया था। इस घटना में दोनों देशों के सैनिकों की जान गई थी। इसके बाद वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सैनिकों की तैनाती बढ़ी और दोनों देशों के बीच भरोसे को गहरा झटका लगा। सीमा विवाद को सुलझाने के लिए कई दौर की सैन्य और कूटनीतिक बातचीत भी हुई।
भारत लगातार यह कहता रहा है कि सीमा पर शांति बनाए रखना दोनों देशों के रिश्तों की सबसे जरूरी शर्त है। सीमा पर तनाव रहने की स्थिति में व्यापार, निवेश और दूसरे क्षेत्रों में सहयोग को पूरी तरह सामान्य बनाना आसान नहीं होगा। भारत चाहता है कि सीमा से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से निकाला जाए।
जयशंकर के इस संदेश से साफ है कि भारत चीन के साथ अच्छे संबंध बनाने के खिलाफ नहीं है, लेकिन इसके लिए चीन को भी जिम्मेदारी दिखानी होगी। भारत की प्राथमिकता अपनी सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है। दोनों देशों के बीच बातचीत और सहयोग के रास्ते खुले रह सकते हैं, लेकिन सीमा पर शांति बनाए रखना इसके लिए जरूरी है।
भारत और चीन एशिया के दो बड़े देश हैं और दोनों के रिश्तों का असर क्षेत्रीय शांति और वैश्विक राजनीति पर भी पड़ता है। ऐसे में सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के हित में है। हालांकि, संबंधों को पूरी तरह सामान्य बनाने के लिए केवल बातचीत काफी नहीं होगी, बल्कि सीमा पर शांति, भरोसे और समझौतों का पालन भी जरूरी होगा।





