सावन के पहले सोमवार पर बाबा विश्वनाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब

सावन के पहले सोमवार के अवसर पर में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। तड़के ब्रह्म मुहूर्त से ही भक्तों की लंबी कतारें मंदिर परिसर और आसपास की सड़कों तक दिखाई दीं। हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयकारों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया।


श्रद्धालु गंगा स्नान के बाद बाबा विश्वनाथ के दर्शन और जलाभिषेक के लिए मंदिर पहुंचे। कई श्रद्धालु दूर-दराज के राज्यों से भी वाराणसी पहुंचे थे। कांवड़िए भी पवित्र गंगाजल लेकर भगवान शिव का अभिषेक करने के लिए बड़ी संख्या में मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बेलपत्र, धतूरा, भांग, फूल और दूध अर्पित कर भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की।


श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया। भीड़ को व्यवस्थित ढंग से दर्शन कराने के लिए बैरिकेडिंग, अलग-अलग प्रवेश और निकास मार्ग तथा कंट्रोल रूम की व्यवस्था की गई। सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से पूरे क्षेत्र की निगरानी की गई ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।


मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं से धैर्य बनाए रखने और निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्राथमिक उपचार केंद्र और एंबुलेंस की व्यवस्था भी की गई, जबकि नगर निगम ने सफाई और पेयजल की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित की।


सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस माह के प्रत्येक सोमवार को व्रत और शिव पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं तथा सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इसी कारण सावन के सोमवारों पर देशभर के शिव मंदिरों में विशेष भीड़ देखने को मिलती है।


काशी विश्वनाथ मंदिर में पूरे दिन श्रद्धालुओं का आना-जाना जारी रहा। मंदिर परिसर में भक्ति और श्रद्धा का अनूठा संगम देखने को मिला। प्रशासन ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है तथा पूरे सावन माह में विशेष व्यवस्थाएं लागू रहेंगी।


सावन के पहले सोमवार पर बाबा विश्वनाथ के दरबार में उमड़ी यह अपार आस्था एक बार फिर सनातन परंपरा और भगवान शिव के प्रति श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का प्रतीक बनकर सामने आई।