दिल्ली के सत्या निकेतन में छात्र पीजी भवन के गिरने से हुई मौतों के मामले में पूर्व IPS अधिकारी Kiran Bedi ने दिल्ली हाईकोर्ट में हस्तक्षेप की मांग की है। उनका उद्देश्य मामले में अदालत की सहायता करना और प्रशासनिक अनुभव के आधार पर कुछ महत्वपूर्ण पहलुओं को सामने रखना बताया गया है। हालांकि, केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की ओर से उनकी याचिका का विरोध किया गया है। यह मामला 6 सितंबर को साउथ दिल्ली के सत्या निकेतन इलाके में एक पांच मंजिला इमारत के ढहने से जुड़ा है। इस इमारत में दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए पीजी सुविधा संचालित थी। हादसे में सात लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच छात्र शामिल थे, जबकि कई अन्य घायल हुए। पुलिस के अनुसार, हादसे के समय इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत का काम चल रहा था।

हादसे के बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले को गंभीरता से लेते हुए MCD को उच्च स्तर पर जांच करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि पीजी और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की जांच जरूरी है। कोर्ट ने दिल्ली में छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के मुद्दे पर भी चिंता जताई। किरण बेदी की याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने उनके प्रशासनिक अनुभव को उपयोगी बताया और अधिकारियों से उनकी याचिका पर जवाब मांगा। वहीं, केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने तर्क दिया कि बेदी की दखल मामले के तथ्यों पर पहले से राय बनाने जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। अदालत ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर को होनी है। सत्या निकेतन हादसे ने दिल्ली में छात्रों के निजी पीजी और हॉस्टल की सुरक्षा, भवन निर्माण नियमों के पालन और निगरानी व्यवस्था पर व्यापक सवाल खड़े किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली हाईकोर्ट की कार्यवाही को जारी रखने और मामले की नियमित निगरानी करने की अनुमति दी है।





