लद्दाख में फिर आंदोलन, 19 सितंबर से प्रदर्शन

लद्दाख में राज्य का दर्जा और संवैधानिक सुरक्षा समेत कई मांगों को लेकर एक बार फिर माहौल गरम होता नजर आ रहा है। केंद्र सरकार और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच हाल ही में हुई बातचीत में कोई ठोस सहमति नहीं बन पाई। इसके बाद लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) ने आंदोलन का ऐलान किया है। दोनों संगठनों का कहना है कि लद्दाख के लोगों की लंबे समय से चली आ रही मांगों पर केंद्र को स्पष्ट और ठोस फैसला लेना चाहिए। प्रतिनिधियों के मुताबिक, बातचीत के दौरान जिन मुद्दों पर चर्चा हुई, उनमें राज्य का दर्जा, संवैधानिक सुरक्षा, स्थानीय लोगों के अधिकार और रोजगार से जुड़े विषय प्रमुख रहे।

लद्दाख के सामाजिक और राजनीतिक संगठनों की प्रमुख मांगों में राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची के तहत विशेष सुरक्षा शामिल है। इसके अलावा स्थानीय लोगों के लिए जमीन, रोजगार, संस्कृति और पर्यावरण से जुड़े अधिकारों की सुरक्षा की मांग भी लगातार उठाई जा रही है। केंद्र की ओर से लद्दाख के लिए एक अलग संवैधानिक व्यवस्था का प्रस्ताव सामने रखा गया है, जिसमें विशेष प्रावधान के जरिए स्थानीय प्रशासन को ज्यादा अधिकार देने और एक निर्वाचित निकाय बनाने की बात कही गई है। हालांकि, लद्दाख के प्रतिनिधि इसे अपनी सभी मांगों का समाधान नहीं मान रहे हैं। बातचीत में अपेक्षित मसौदा सामने नहीं आने को लेकर भी संगठनों ने असंतोष जताया है।

केंद्र से बातचीत में गतिरोध के बाद LAB और KDA ने विरोध-प्रदर्शन की तैयारी शुरू कर दी है। संगठनों ने केंद्र को अपनी मांगों पर आगे बढ़ने के लिए समय दिया है और मांगें पूरी नहीं होने की स्थिति में 19 सितंबर से विरोध-प्रदर्शन शुरू करने की बात कही है। दूसरी ओर, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने आंदोलन को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने ऐसे लोगों पर लद्दाख के विकास से ज्यादा अपने राजनीतिक हितों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया। अब सभी की नजरें केंद्र और लद्दाख के प्रतिनिधियों के बीच होने वाली अगली बातचीत पर हैं, क्योंकि इसी से तय होगा कि दोनों पक्षों के बीच जारी गतिरोध किस दिशा में आगे बढ़ता है।