लखनऊ में 8 महीने से शिक्षकों की कमी, बोर्ड परीक्षा सिर पर; छात्राओं का प्रदर्शन, पढ़ाई प्रभावित होने का आरोप

राजधानी लखनऊ के एक सरकारी विद्यालय में शिक्षकों की कमी को लेकर छात्राओं का आक्रोश सामने आया है। छात्राओं का कहना है कि स्कूल में पिछले करीब 8 महीनों से कई विषयों के शिक्षक नहीं हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। सबसे बड़ी चिंता अब बोर्ड परीक्षाओं को लेकर है, क्योंकि छात्राओं के मुताबिक करीब 5 महीने बाद बोर्ड की परीक्षाएं होने वाली हैं और पाठ्यक्रम पूरा करने को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।मामला समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विद्यालय से जुड़ा बताया जा रहा है। छात्राओं के अनुसार, स्कूल में फिजिक्स समेत कई महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं। लंबे समय से शिक्षक न होने के कारण नियमित कक्षाएं प्रभावित हो रही हैं और छात्राओं को अपने विषयों की तैयारी खुद करने या दूसरे माध्यमों पर निर्भर रहने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

बोर्ड परीक्षा नजदीक आने के कारण छात्राओं की चिंता और बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि समय रहते विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति या व्यवस्था नहीं की गई तो उनका पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं हो पाएगा। इसका सीधा असर परीक्षा के परिणाम और भविष्य की पढ़ाई पर पड़ सकता है। छात्राओं ने इसी समस्या को लेकर प्रदर्शन किया और जिम्मेदार अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

प्रदर्शन के दौरान छात्राओं ने जिलाधिकारी और मुख्यमंत्री को मौके पर बुलाने की मांग भी की। छात्राओं ने अपनी समस्याओं को लेकर नारेबाजी की और शिक्षकों की कमी जल्द दूर करने की मांग उठाई। उनका कहना है कि वे किसी विवाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी को लेकर अपनी बात प्रशासन तक पहुंचाना चाहती हैं।

लखनऊ में शिक्षकों की कमी का मुद्दा केवल इसी विद्यालय तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन की ओर से जून 2026 में जारी दस्तावेज में राजकीय माध्यमिक बालक और बालिका विद्यालयों में विषयवार और पदवार रिक्तियों का विवरण भी उपलब्ध कराया गया था। इससे जिले के सरकारी माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों के खाली पदों का मुद्दा पहले से प्रशासनिक रिकॉर्ड में मौजूद होने का पता चलता है।

प्रदेश स्तर पर भी शिक्षक कमी को दूर करने के लिए विभाग की ओर से कदम उठाए जा रहे हैं। जुलाई में उत्तर प्रदेश के 16,986 परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शिक्षकों की कमी की जानकारी सामने आई थी। इन स्कूलों में कमी दूर करने के लिए दूसरे विद्यालयों में मौजूद सरप्लस शिक्षकों को स्थानांतरित या समायोजित करने की योजना बताई गई थी।

हालांकि, बोर्ड कक्षाओं के विद्यार्थियों के लिए समस्या की गंभीरता इसलिए ज्यादा है क्योंकि परीक्षा की तैयारी के लिए उनके पास सीमित समय बचा है। खासकर विज्ञान जैसे विषयों में नियमित शिक्षक, कक्षा में पढ़ाई और शंकाओं का समाधान विद्यार्थियों की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

अब छात्राओं की मांग है कि स्कूल में जल्द से जल्द सभी जरूरी विषयों के शिक्षकों की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई पटरी पर लौट सके और बोर्ड परीक्षा से पहले पाठ्यक्रम पूरा कराया जा सके। फिलहाल छात्रों की मांग और प्रशासन की ओर से होने वाली कार्रवाई पर नजर बनी हुई है।