रूस और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार को लेकर एक अहम समझौता हुआ है। इसके तहत रूस 22 अक्टूबर को डीजल से भरा अपना पहला टैंकर अमेरिका के लिए रवाना करेगा। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई बातचीत के बाद लिया गया है। रूस के उपप्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक के अनुसार, टैंकर में करीब 40 हजार मीट्रिक टन डीजल होगा। हालांकि, अमेरिका में इसे किस बंदरगाह पर पहुंचाया जाएगा, इसकी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।
इस समझौते की खास बात यह है कि रूस से डीजल की आपूर्ति पर लगी कुछ अमेरिकी पाबंदियों में अस्थायी राहत दी गई है। रूस ने भी घरेलू बाजार में ईंधन की कमी को देखते हुए लगाए गए अपने निर्यात प्रतिबंधों में ढील दी है। यूक्रेन के ड्रोन हमलों के कारण रूस की कई तेल रिफाइनरियों का उत्पादन प्रभावित हुआ था, जिससे देश में ईंधन की उपलब्धता पर दबाव बढ़ गया था। अब रूस अपनी क्षमता के अनुसार दूसरे देशों को भी डीजल की आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी कर रहा है।
अमेरिका में डीजल की बढ़ती कीमतें इस समझौते की एक बड़ी वजह मानी जा रही हैं। डीजल का इस्तेमाल ट्रकों, माल ढुलाई, खेती और कई औद्योगिक कामों में होता है। इसकी कीमत बढ़ने से सामान की ढुलाई महंगी हो सकती है और आम लोगों पर भी महंगाई का असर पड़ सकता है। ट्रंप प्रशासन नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले ईंधन की कीमतों को नियंत्रित करना चाहता है। ऐसे में रूस से डीजल की आपूर्ति बढ़ाना अमेरिका के लिए राहत देने वाला कदम हो सकता है।
ट्रंप ने पहले कहा था कि रूस शुरुआती तौर पर 3 लाख मीट्रिक टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा। इसके बाद नवंबर में 5 लाख मीट्रिक टन और फिर 10 लाख मीट्रिक टन डीजल भेजने की योजना बताई गई थी। रूसी अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि शुरुआती खेप के बाद अन्य टैंकर भेजे जा सकते हैं। हालांकि, इन आपूर्तियों की वास्तविक मात्रा रूस की उत्पादन क्षमता और घरेलू जरूरतों पर निर्भर करेगी।
इस समझौते की आलोचना भी हो रही है। यूक्रेन और कुछ यूरोपीय देशों को चिंता है कि रूस के साथ ऊर्जा व्यापार बढ़ने से उसकी अर्थव्यवस्था को फायदा मिल सकता है। वहीं, विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की पहली खेप से अमेरिका में कीमतों में तुरंत बड़ी गिरावट आने की संभावना कम है, क्योंकि वहां ईंधन की मांग काफी अधिक है। इसके बावजूद यह समझौता रूस और अमेरिका के बीच ऊर्जा व्यापार में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।





