राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करने वाले विपक्षी नेताओं के प्रतिनिधिमंडल में उद्धव ठाकरे गुट शामिल नहीं होगा। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) ने इस संबंध में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे को पत्र लिखकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पार्टी ने बताया कि पहले से तय कार्यक्रमों और व्यस्तताओं के कारण उसके नेता इस मुलाकात में शामिल नहीं हो पाएंगे।
विपक्षी नेताओं का प्रतिनिधिमंडल मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और कथित वोट चोरी के मुद्दे पर राष्ट्रपति से मुलाकात करना चाहता था। विपक्ष का उद्देश्य इन मुद्दों पर अपनी चिंताएं राष्ट्रपति के सामने रखना और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर ध्यान आकर्षित करना था। इस दौरान मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग का मुद्दा भी उठाया जाना था।
उद्धव ठाकरे गुट की ओर से संजय राउत और अरविंद सावंत ने पत्र में अपनी अनुपस्थिति की वजह बताई। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में विधान परिषद चुनावों से जुड़े पहले से निर्धारित कार्यक्रमों के कारण वे राष्ट्रपति से मुलाकात में शामिल नहीं हो सकेंगे। साथ ही, उन्होंने इस बैठक में शामिल न हो पाने पर खेद भी जताया।
हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट ने स्पष्ट किया कि इस मुलाकात में शामिल नहीं होने का मतलब INDIA गठबंधन के अभियान से दूरी बनाना नहीं है। पार्टी ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष की चिंताओं का समर्थन करते हुए लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए गठबंधन के साथ खड़े रहने की बात कही।
इस घटनाक्रम के बाद विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, उद्धव ठाकरे गुट ने अपने पत्र के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की है कि उसकी अनुपस्थिति केवल पहले से तय कार्यक्रमों के कारण है और वह चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों पर विपक्ष के रुख का समर्थन करता रहेगा।





